बेहतर खाद्यान्न प्रबंधन के लिए सार्वजनिक वितरण विभाग और एफसीआई के बीच समझौता

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने 2026-27 के लिए एक एमओयू पर दस्तखत किए हैं, जिसमें खाद्यान्न भंडारण, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता नियंत्रण और डिजिटलीकरण में सुधार के लक्ष्य तय किए गए हैं।

बेहतर खाद्यान्न प्रबंधन के लिए सार्वजनिक वितरण विभाग और एफसीआई के बीच समझौता

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य देश की खाद्यान्न प्रबंधन व्यवस्था में परिचालन दक्षता बढ़ाना, जवाबदेही मजबूत करना और आधुनिकीकरण को गति देना है। समझौते में एफसीआई के लिए व्यापक प्रदर्शन आधारित ढांचा तैयार किया गया है। 

समझौते में भंडारण, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीक अपनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े स्पष्ट वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसका प्रमुख फोकस भंडारण में होने वाले नुकसान को कम करने और भंडारण क्षमता का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर है। इसके साथ ही एफसीआई की लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन व्यवस्था में सुधार तथा गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

इस ढांचे में व्यावसायिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और आधुनिक आईटी सॉल्यूशन अपनाने को विशेष महत्व दिया गया है। इन उपायों से एफसीआई के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ गतिविधियों की निगरानी को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

समझौते में एफसीआई कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और कौशल विकास कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है। इससे संगठन को उभरती तकनीकों और खाद्यान्न प्रबंधन की आधुनिक प्रणालियों को प्रभावी ढंग से अपनाने में मदद मिलेगी।

खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत 1965 में स्थापित एफसीआई देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह केंद्र सरकार की ओर से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण का काम करता है। सार्वजनिक संसाधनों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को देखते हुए खाद्य सब्सिडी का कुशल उपयोग और परिचालन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

समझौते में परिणाम और लक्ष्य आधारित मानकों को शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य एफसीआई डिपो के इन्फ्राट्रक्चर को मजबूत करना, परिचालन प्रदर्शन में सुधार करना और निरंतर सुधार की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है।

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