रॉ शुगर आयात के नियम में ढील, 31 अक्टूबर की जगह बिल ऑफ एंट्री के दो माह के भीतर घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति

सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के TRQ आयात नियमों में ढील देते हुए घरेलू बिक्री की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 की तय तारीख से बदलकर बिल ऑफ एंट्री दाखिल होने के दो महीने के भीतर कर दी है। यह बदलाव चीनी मिलों को आयातित रॉ शुगर के प्रसंस्करण और बिक्री के लिए अतिरिक्त समय देगा।

रॉ शुगर आयात के नियम में ढील, 31 अक्टूबर की जगह बिल ऑफ एंट्री के दो माह के भीतर घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति

सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर आयात से संबंधित आदेश में संशोधन किया है। इस संशोधन के जरिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) योजना के अंतर्गत रॉ शुगर के आयात और प्रसंस्करण की समय-सीमा में बदलाव किया गया है। इससे आयात करने वाली चीनी मिलों को अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद है।

7 सितंबर को प्रकाशित संशोधन में कहा गया है कि 10 लाख मीट्रिक टन TRQ कोटा के तहत रॉ शुगर का आयात करने वाले आयातकों को अब 'बिल ऑफ एंट्री' दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने के भीतर इसे सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा। 

इससे पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की तरफ से 20 अगस्त 2026 को जारी मूल अधिसूचना में कहा गया था कि आयातित रॉ शुगर को रिफाइन करके सफेद या रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा। मूल अधिसूचना की अन्य सभी शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी।

मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन कम रहने और हाल के कुछ हफ्तों में खुदरा कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ने के कारण सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर आयात की अनुमति दी है। आयात की अधिसूचना जारी होने के अगले ही दिन उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन का था।

चीनी की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने और भी कई कदम उठाए हैं। इसमें सितंबर से चीनी मिलों के लिए मासिक की जगह दो सप्ताह का कोटा जारी करने का निर्णय भी शामिल है। नई व्यवस्था के तहत मिलों को आवंटित चीनी की कम से कम 40 प्रतिशत मात्रा पहले सप्ताह में बेचनी होगी, जबकि शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेची जाएगी।

इसके अलावा, चीनी डीलरों के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा भी 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है। यह व्यवस्था 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। सरकार ने 1 अगस्त से देशभर में चीनी डीलरों के लिए 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू की थी। 

इन कदमों का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना तथा उचित कीमतों पर घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। हालांकि खुदरा बाजार में अब भी चीनी 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही है।

पिछले दिनों नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने कहा था कि चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें लगातार गिर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और आने वाले दिनों में रिटेल कीमतें कम हो जाएंगी। इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने बताया कि चीनी की एक्स-मिल कीमतें उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत घटी हैं। सरकार के कहने पर नेशनल फेडरेशन और इस्मा ने संयुक्त रूप से यह भी तय किया है कि चीनी मिलों में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू की जाएगी, ताकि चीनी की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। 

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