कमजोर मानसून से तूर दाल की कीमतों में तेजी, आयात लागत बढ़ने की भी चिंता
महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश और फसल की स्थिति को देखते हुए तूर (अरहर) दाल की कीमतों में हाल में तेजी आई है। उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार, 9 सितंबर को खुदरा कीमत 124.04 रुपये प्रति किलोग्राम थी। उत्पादन की स्थिति को देखते हुए आयात की जरूरत बड़ी बनी रहेगी। कमजोर रुपये से आयात की लागत भी बढ़ने का अंदेशा है।
हाल के दिनों में तूर (अरहर) दाल की खुदरा और थोक दोनों कीमतों में तेजी आई है। इसकी प्रमुख वजह उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश की कमी है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को अरहर दाल की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 124.04 रुपये प्रति किलोग्राम रही। यह एक महीने पहले 121.96 रुपये और एक साल पहले 116.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
थोक बाजार में भी कीमतों में मजबूती देखी गई। 9 सितंबर को औसत थोक कीमत 11,471.39 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि एक महीने पहले यह 11,248.27 रुपये और एक साल पहले 10,645.36 रुपये प्रति क्विंटल थी। इस तरह एक महीने में कीमत में 2% और सालाना आधार पर 7.75% की वृद्धि हुई है।
हालांकि इस खरीफ सीजन में अरहर की बुवाई पिछले साल से बेहतर रही है। UPAJ पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक इसका रकबा 45.66 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि 2025-26 में इसी अवधि में यह 44.93 लाख हेक्टेयर था। यानी बुवाई क्षेत्र में 1.61% की वृद्धि हुई है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में तूर उत्पादन 35.92 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 36.24 लाख टन के लगभग बराबर है।
हालांकि, बाजार की नजर महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल की स्थिति पर है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, देश के कुल तूर उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 39.44% और कर्नाटक की 27.78% है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में अब तक महाराष्ट्र में सामान्य से 68% कम बारिश हुई है, जबकि कर्नाटक में बारिश की कमी 77% रही। पूरे मानसून सीजन में इन दोनों राज्यों में बारिश की कमी क्रमशः 16% और 27% है।
उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़े भले ही बताते हों कि एक महीने में थोक कीमत करीब 225 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए वास्तविक कीमत वृद्धि इससे अधिक है। बाजार में पिछले एक महीने के दौरान तूर के भाव में करीब 600-800 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी देखने को मिली है। अनेक जगहों पर खुदरा कीमत 180 रुपये प्रति किलो से अधिक है।
भारत ने 2025-26 में करीब 14.8 लाख टन तूर का आयात किया, जबकि सालाना खपत का अनुमान 45-47 लाख टन है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार इस साल उत्पादन 34-36 लाख टन रह सकता है। ऐसे में घरेलू मांग पूरी करने के लिए करीब 13 लाख टन तुअर के आयात की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन कमजोर रुपया आयात की लागत बढ़ा सकता है। सितंबर 2025 में एक डॉलर करीब 88 रुपये का था, जो अब लगभग 95 रुपये हो गया है। इससे आयातित तूर की लैंडेड लागत बढ़ेगी।
आगे तूर की कीमतों का रुख फसल की वास्तविक स्थिति, आयातित दाल की उपलब्धता और मिलों की खरीद पर निर्भर करेगा। भारत मुख्य रूप से मोजाम्बिक, म्यांमार और तंजानिया से तूर दाल का आयात करता है।

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