इथेनॉल के लिए धान के MSP से भी कम रेट पर बिकेगा सरकारी चावल, OMSS नीति जारी
जिस चावल की बिक्री सरकार इथेनॉल उत्पादन के लिए 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने जा रही है, उसके लिए वर्ष 2025-26 के दौरान किसानों से 2,369 रुपये प्रति क्विंटल के MSP पर धान खरीदा गया था।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत सरकारी भंडार से गेहूं, चावल और मोटे अनाज बिक्री की नीति घोषित कर दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत निजी व्यापारियों, राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं और इथेनॉल डिस्टिलरियों को अनाज बिक्री के लिए अलग-अलग आरक्षित मूल्य तय किए गये हैं।
OMSS नीति 2026-27 के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन के लिए FCI के स्टॉक से चावल की बिक्री 31 अक्टूबर तक 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तथा उसके बाद 2,390 रुपये प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर की जाएगी। यह मूल्य केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित धान (कॉमन ग्रेड) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपए प्रति क्विंटल से भी कम है।
सरकारी गोदामों से इथेनॉल के लिए जिस चावल की बिक्री 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होने जा रही है, उसके लिए सरकार ने 2025-26 में किसानों से 2,369 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी पर धान खरीदा था। इथेनॉल के लिए कितना चावल बेचा जाएगा, अभी यह तय नहीं है। इसका फैसला मंत्रियों की समिति करेगी।
OMSS नीति में कहा गया है कि इथेनॉल डिस्टिलरियों को आपूर्ति के लिए जहां तक संभव हो, पुराने या टूटे चावल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
नीतिगत सवाल
एक क्विंटल धान से सामान्यतः लगभग 67 किलोग्राम चावल प्राप्त होता है। धान के MSP के अलावा खरीद संबंधी खर्च, मिलिंग चार्ज, भंडारण और परिवहन सहित अन्य खर्च जोड़ने पर चावल की अनुमानित आर्थिक लागत (Economic Cost) लगभग 41 रुपए प्रति किलोग्राम, यानी 4,100 रुपए प्रति क्विंटल बैठती है।
इस प्रकार लगभग 4,100 रुपए प्रति क्विंटल की लागत वाला चावल सरकार इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल 2,320 रुपए प्रति क्विंटल की दर से डिस्टिलरियों को उपलब्ध कराएगी। इससे खुले बाजार में चावल की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
इस नीति को लेकर सवाल उठ सकते हैं। क्योंकि सरकार इथेनॉल से किसानों की आमदनी बढ़ाने का दावा करती है। लेकिन जब खुद सरकार ही धान के एमएसपी के कम रेट पर चावल की बिक्री करेगी, तो किसानों को धान का बेहतर दाम कैसे मिलेगा?
कमजोर मानसून और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकारी भंडार से चावल को अनुमानित आर्थिक लागत के लगभग आधे दाम पर इथेनॉल उत्पादन के लिए बेचना कितना उचित है? यह भी एक बड़ा सवाल है।
चावल बिक्री की आरक्षित दरें
OMSS नीति के तहत राज्य सरकारों और सामुदायिक रसोईघरों को भी 31 अक्टूबर तक 2,320 रुपये प्रति क्विंटल और उसके बाद 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
25 प्रतिशत टूटे चावल (खरीफ सीजन 2025-26) का आरक्षित मूल्य 31 अक्टूबर तक 2,890 रुपये प्रति क्विंटल और उसके बाद 2,970 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
छोटे व्यापारी और उद्यमी FCI डिपो से चावल 31 अक्टूबर तक 2,890 रुपये और उसके बाद 2,970 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद सकेंगे। वहीं, 'भारत' ब्रांड के लिए केंद्रीय सहकारी संस्थाओं को 30 अक्टूबर तक 2,480 रुपये और उसके बाद 2,550 रुपये प्रति क्विंटल के आरक्षित मूल्य पर चावल उपलब्ध कराया जाएगा। चावल के लिए निर्धारित रिजर्व प्राइस में परिवहन व्यय भी शामिल है।
गेहूं का आरक्षित मूल्य 2,600 रुपये प्रति क्विंटल
सरकार ने OMSS के तहत फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) गेहूं का रिजर्व प्राइस 2,600 रुपये तथा मानकों में छूट वाले (URS) गेहूं का रिजर्व प्राइस 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। ये दरें 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेंगी और इनमें परिवहन लागत शामिल नहीं होगी।
रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में केंद्र सरकार ने किसानों से गेहूं की खरीद 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के MSP पर की थी। गेहूं बिक्री की मात्रा और समय एफसीआई द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के परामर्श से तय किया जाएगा। इसमें पीडीएस की जरूरतों, निर्धारित बफर स्टॉक मानकों और आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त 20 लाख टन गेहूं का भंडार सुनिश्चित किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने OMSS नीति की घोषणा ऐसे समय की है, जब उसके पास गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वहीं, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, संभावित अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका के कारण खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ने और खाद्य महंगाई का जोखिम बना हुआ है।

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