डेयरी और डिफेंस की साझेदारी से आपूर्ति श्रृंखला और किसानों की नियमित आय सुनिश्चित: डॉ. मीनेश शाह

NCDFI और भारतीय सेना ने चार दशक पुरानी डेयरी-डिफेंस साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया है। डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि इससे रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद दूध आपूर्ति, सहकारी समितियों को सुनिश्चित बाजार और किसानों को नियमित आय मिल रही है। सीमावर्ती व पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ताजा दूध की आपूर्ति बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

डेयरी और डिफेंस की साझेदारी से आपूर्ति श्रृंखला और किसानों की नियमित आय सुनिश्चित: डॉ. मीनेश शाह

डेयरी सहकारी समितियों और रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच चार दशक पुरानी साझेदारी सैनिकों को भरोसेमंद दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ डेयरी किसानों के लिए सुनिश्चित बाजार और नियमित आय के अवसर पैदा कर रही है। नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCDFI) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने यह बात कही।

“कोऑपरेटिव कॉन्क्लेव ऑन डेयरी-डिफेंस पार्टनरशिप” को संबोधित करते हुए डॉ. शाह ने कहा कि इस साझेदारी से डेयरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े सभी पक्षों को लाभ मिल रहा है। रक्षा प्रतिष्ठानों को भरोसेमंद आपूर्ति और मजबूत सप्लाई चेन मिल रही है, डेयरी सहकारी समितियों को सुनिश्चित संस्थागत बाजार और अपने बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग का अवसर मिल रहा है, जबकि किसानों को व्यापक बाजार और अधिक स्थिर आय प्राप्त हो रही है।

NCDFI और भारतीय सेना ने स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद, प्रसंस्करण और कोल्ड-चेन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए डेयरी सहकारी नेटवर्क के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें विशेष रूप से सीमावर्ती और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है।

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. शाह ने दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में दूध खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और आपूर्ति श्रृंखला के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए डेयरी सहकारी समितियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “आपूर्ति किया गया हर अतिरिक्त लीटर दूध डेयरी किसानों और देश की सेवा कर रहे रक्षा कर्मियों को एक-दूसरे के और करीब लाता है।” उन्होंने इस साझेदारी के व्यापक आर्थिक और सामाजिक महत्व को भी रेखांकित किया।

भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ सप्लाइज एंड ट्रांसपोर्ट (DGST) लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात सैनिकों को भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए NCDFI और उसकी सदस्य सहकारी समितियों की सराहना की। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी सहकारी समितियों को संगठित, प्रोत्साहित और मजबूत करने तथा स्थानीय दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए NDDB के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

लेफ्टिनेंट जनरल चड्ढा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में डेयरी सहकारी समितियों की मजबूत मौजूदगी से स्थायी बाजार विकसित हो सकते हैं, स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ सकते हैं तथा पलायन को उलटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने ताजे दूध की आपूर्ति बढ़ाने और जरूरतों का आकलन कर स्थानीय क्षमताएं विकसित करने के लिए सेना और NCDFI के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

ताजा दूध की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर

कॉन्क्लेव में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और असम राइफल्स के प्रतिनिधियों तथा सीमावर्ती और पूर्वोत्तर राज्यों की डेयरी सहकारी समितियों के प्रबंध निदेशकों ने भाग लिया। इसमें सशस्त्र बलों और अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों को सहकारी क्षेत्र के माध्यम से आपूर्ति मजबूत करने के लिए परिचालन अनुभवों, उभरती जरूरतों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में उन क्षेत्रों में ताजे दूध की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया, जहां स्थानीय खरीद, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स संबंधी बुनियादी ढांचा इसके अनुकूल है। इससे UHT दूध पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है, जबकि उन स्थानों पर लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले उत्पादों की आपूर्ति जारी रखी जा सकती है, जहां परिचालन कारणों से उनकी आवश्यकता बनी हुई है।

वर्तमान में UHT दूध की आपूर्ति 4.11 करोड़ लीटर है। कॉन्क्लेव में मांग की बेहतर जानकारी, उत्पाद के मुताबिक क्षमता का आकलन, वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने, गुणवत्ता एवं कोल्ड-चेन प्रणाली में सुधार, डिजिटल समन्वय, उत्पादों की विविधता बढ़ाने और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स विकसित करने पर जोर दिया गया।

117 डेयरी सहकारी समितियां साझेदारी में शामिल

NCDFI का रक्षा मंत्रालय के साथ जुड़ाव 1984 में शुरू हुआ था। पिछले चार दशकों में यह साझेदारी बढ़कर 117 डेयरी सहकारी समितियों तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस साझेदारी के तहत अनुबंध 1,627 करोड़ रुपये का रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा प्रतिष्ठानों को ताजे दूध की आपूर्ति बढ़कर 18.48 करोड़ लीटर हो गई, जबकि ताजा और UHT दूध की संयुक्त आपूर्ति 22.60 करोड़ लीटर रही।

सीमावर्ती और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की डेयरी सहकारी समितियां भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन क्षेत्रों की 10 डेयरी सहकारी समितियों ने 2025-26 में 196 सेना इकाइयों को 6.44 करोड़ लीटर ताजा दूध की आपूर्ति की।

कॉन्क्लेव का समापन डेयरी सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद बढ़ाने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक मजबूत, कुशल और भरोसेमंद आपूर्ति प्रणाली विकसित करने की NCDFI और रक्षा प्रतिष्ठानों की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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