ग्रीन यूरिया संयंत्र स्थापना के लिए उद्योग से प्रस्ताव आमंत्रित, सरकार की हर साल 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया खरीदने की योजना
उर्वरक विभाग ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित ढांचे में प्रतिवर्ष 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया की खरीद, सब्सिडी और कार्बन कैप्चर तकनीक के उपयोग के माध्यम से पारंपरिक यूरिया उत्पादन पर निर्भरता कम करने की योजना शामिल है।
उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्रों की स्थापना की दिशा में उद्योग से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किया है। इसी क्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के हितधारकों के साथ एक प्री-ईओआई बैठक आयोजित की गई। नोएडा स्थित प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में एनटीपीसी, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी), उर्वरक कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माताओं तथा ग्रीन हाइड्रोजन एवं ग्रीन अमोनिया क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उर्वरक विभाग के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप तैयार की जा रही है और इसका उद्देश्य घरेलू यूरिया उत्पादन में ग्रीन अमोनिया के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हरित ऊर्जा अवसंरचना के विकास के लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उर्वरक विभाग ग्रीन अमोनिया को उर्वरक निर्माण श्रृंखला में शामिल करने के लिए आवश्यक नीतिगत ढांचा तैयार करेगा।
ग्रीन अमोनिया की उत्पादन लागत पारंपरिक ग्रे अमोनिया की तुलना में अधिक होने के कारण विभाग ने ऑफटेकर-साइड डिफरेंशियल सब्सिडी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ग्रीन अमोनिया उत्पादकों से खरीद करेगी और उसे घरेलू उर्वरक कंपनियों को बाजार आधारित ग्रे अमोनिया कीमतों पर उपलब्ध कराएगी। खरीद लागत और आपूर्ति मूल्य के बीच का अंतर उर्वरक विभाग वहन करेगा।
प्रस्तावित नीति के तहत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के मोड-2ए के अंतर्गत प्रतिवर्ष 7.24 लाख मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की खरीद प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स नीलामी के माध्यम से की जाएगी, जिसका संचालन सेकी करेगी। चयनित परियोजनाओं को व्यावसायिक आपूर्ति शुरू होने के बाद वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा दीर्घकालिक समझौतों के तहत यह सहायता 10 वर्षों तक उपलब्ध रहेगी।
बैठक में आंध्र प्रदेश के पुडीमाडाका स्थित 150 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता वाले ग्रीन यूरिया पायलट संयंत्र पर भी चर्चा हुई। एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास इकाई नेट्रा द्वारा विकसित यह परियोजना वाटर इलेक्ट्रोलिसिस और कार्बन कैप्चर एवं उपयोग (सीसीयूएस) तकनीक को एकीकृत कर ग्रीन यूरिया उत्पादन का प्रदर्शन करती है।
उर्वरक विभाग के अनुसार, भारत वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ मीट्रिक टन यूरिया का आयात करता है, जबकि कई घरेलू यूरिया संयंत्र 30 वर्ष से अधिक पुराने हैं। विभाग का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड के एकीकृत उपयोग के माध्यम से ग्रीन यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित करने से घरेलू उर्वरक उत्पादन के स्रोतों में विविधता लाई जा सकती है।

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