मानसून सीजन आधा गुजरा: बारिश 13 फीसदी कम, बुवाई 3 फीसदी पिछड़ी, प्रमुख जलाशयों में आधे से कम पानी

जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई में मानसून ने वापसी की, जिससे खरीफ बुवाई में तेजी आई। हालांकि, 31 जुलाई तक देश में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का केवल 44.39 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है, जिससे खरीफ उत्पादन और आगामी रबी सीजन को लेकर चिंता बनी हुई है।

मानसून सीजन आधा गुजरा: बारिश 13 फीसदी कम, बुवाई 3 फीसदी पिछड़ी, प्रमुख जलाशयों में आधे से कम पानी

दक्षिण-पश्चिम मानसून का आधा सीजन गुजर चुका है। जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई में मानसून ने जोरदार वापसी की, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई और शुरुआती नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो गई। हालांकि, पूरे मानसून सीजन (1 जून से 31 जुलाई) के दौरान देश में अब भी सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं खरीफ फसलों की बुवाई का अंतर पिछले वर्ष के मुकाबले घटकर 26.50 लाख हेक्टेयर, यानी लगभग 3 प्रतिशत, रह गया है।

जून के अंत तक देश में सामान्य के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई, लेकिन फिर कुछ दिनों तक मानसून ब्रेक जैसी स्थिति बनी रही। जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून दोबारा सक्रिय हुआ और मध्य भारत में सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप 31 जुलाई तक देश में वर्षा की कमी घटकर 13 प्रतिशत रह गई।

क्षेत्रवार देखें तो 1 जून से 31 जुलाई के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 30 प्रतिशत कम, उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत कम तथा दक्षिण भारत में 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके विपरीत मध्य भारत में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

बारिश में सुधार का सीधा असर खरीफ बुवाई पर दिखाई दिया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 894.22 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह रकबा 920.72 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 26.50 लाख हेक्टेयर या 2.88 प्रतिशत कम है। एक महीने पहले यह अंतर 20 प्रतिशत से अधिक था। हालांकि बुवाई का अंतर काफी हद तक कम हो गया है, लेकिन वर्षा की कमी और उसके असमान वितरण का असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

दलहन की बुवाई में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पिछले वर्ष से पीछे है। 31 जुलाई तक दलहनों का कुल रकबा 95.18 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.31 प्रतिशत कम है। इससे अरहर, मूंग और अन्य दलहनी फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, अगस्त में सामान्य या बेहतर वर्षा होने पर स्थिति में और सुधार संभव है।

तिलहन फसलों की बुवाई का रकबा बढ़कर 172.32 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली अधिक है। इसके विपरीत मोटे अनाजों (श्री अन्न एवं अन्य मोटे अनाज) का रकबा 170.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 157.77 लाख हेक्टेयर रह गया है, यानी इसमें 7.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

खरीफ की प्रमुख फसल धान की बुवाई 301.49 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.24 प्रतिशत कम है। मक्का का रकबा घटकर 83.56 लाख हेक्टेयर रह गया, जो 7.31 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। मक्का उत्पादन में कमी का असर इथेनॉल उत्पादन पर भी पड़ सकता है। कपास की बुवाई 103.54 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.38 प्रतिशत कम है। वहीं गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष से 1.51 प्रतिशत अधिक है।

मानसून में सुधार के बावजूद जलाशयों की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार 30 जुलाई तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में 81.479 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी उपलब्ध था, जो उनकी कुल स्टोरेज क्षमता का 44.39 प्रतिशत है। यह जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में 34.43 प्रतिशत कम और सामान्य स्तर से करीब 7 प्रतिशत कम है।

जलाशयों में कम जल भंडारण के कारण यदि अगस्त और सितंबर में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो रबी फसलों की सिंचाई और पेयजल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई राज्यों में हुई भारी वर्षा से जलाशयों के जलस्तर में आगे और सुधार की संभावना है।

जून की कमजोर शुरुआत के बावजूद जुलाई में मानसून की मजबूत वापसी ने कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। यदि अगस्त में भी वर्षा सामान्य या सामान्य से अधिक रहती है, तो खरीफ उत्पादन को लेकर शुरुआती आशंकाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं। हालांकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है। ऐसे में अगस्त और सितंबर के दौरान मानसून की स्थिति खरीफ उत्पादन और आगामी रबी सीजन, दोनों के लिए निर्णायक साबित होगी।

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