तेल वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में आयात 5% बढ़ा, अगस्त में खाद्य तेलों की आयात कीमतों में भी इजाफा
भारत का खाद्य तेल आयात नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान 5 प्रतिशत बढ़कर 136.20 लाख टन हो गया, जिसमें कच्चे खाद्य तेल की हिस्सेदारी 95 प्रतिशत रही। अगस्त में सोयाबीन तेल की मांग से आयात में बढ़ोतरी हुई, हालांकि पाम और दूसरे सॉफ्ट ऑयल का आयात भी बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी से आयात लागत बढ़ रही है।
भारत का खाद्य तेल आयात नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान 5 प्रतिशत बढ़कर 136.20 लाख टन हो गया। पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में आयात 130.25 लाख टन था। खाद्य और गैर-खाद्य तेलों को मिलाकर कुल वनस्पति तेल आयात भी 4 प्रतिशत बढ़कर 138.84 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 133.37 लाख टन था।
द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में खाद्य तेल आयात 15.72 लाख टन रहा, जबकि जुलाई में यह 15.49 लाख टन था। अगस्त में आयात बढ़ने की मुख्य वजह सोयाबीन तेल की बढ़ी मांग रही। कच्चे सोयाबीन तेल का आयात जुलाई के 3.67 लाख टन से बढ़कर अगस्त में 5.54 लाख टन हो गया। रिफाइंड सोयाबीन तेल का आयात भी 62,000 टन से बढ़कर 74,000 टन हो गया।
हालांकि कुल आयात बढ़ा है, लेकिन आयात की संरचना में बड़ा बदलाव आया है। भारत अब रिफाइंड तेल की तुलना में कच्चे खाद्य तेल का अधिक आयात कर रहा है। नवंबर 2025-अगस्त 2026 के दौरान कच्चे खाद्य तेल का आयात 129.61 लाख टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 113.88 लाख टन से करीब 14 प्रतिशत अधिक है। कुल खाद्य तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी 87 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई।
इसके विपरीत, रिफाइंड तेल का आयात 16.36 लाख टन से घटकर 6.59 लाख टन रह गया। इसकी हिस्सेदारी भी 13 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो गई। SEA के अनुसार, इंडोनेशिया और मलेशिया से रिफाइंड पामोलीन का आयात लगभग नगण्य रहने से इसमें बड़ी गिरावट आई है।
पाम और सॉफ्ट ऑयल दोनों के आयात में बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2025-अगस्त 2026 के दौरान पाम तेल का आयात 61.47 लाख टन से बढ़कर 65.34 लाख टन हो गया। कुल खाद्य तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी 47 से बढ़कर 48 प्रतिशत रही। इसी अवधि में सॉफ्ट ऑयल (सोयाबीन, सनफ्लावर, रेपसीड एवं अन्य) का आयात 68.77 लाख टन से बढ़कर 70.86 लाख टन हुआ, हालांकि इसकी हिस्सेदारी 53 से घटकर 52 प्रतिशत हो गई। सॉफ्ट ऑयल के आयात में वृद्धि मुख्य रूप से सोयाबीन तेल की वजह से हुई।
देश के हिसाब से देखें तो सबसे अधिक आयात अर्जेंटीना से हुआ। नवंबर 2025-अगस्त 2026 के दौरान वहां से करीब 30.59 लाख टन खाद्य तेल आया। इसमें 23.72 लाख टन कच्चा सोयाबीन तेल और 6.87 लाख टन कच्चा सूरजमुखी तेल शामिल था। मलेशिया से 26.21 लाख टन और इंडोनेशिया से 25.68 लाख टन आयात हुआ। दोनों देशों से मुख्य रूप से पाम तेल आया। रूस से 12.28 लाख टन आयात हुआ, जिसमें अधिकांश कच्चा सूरजमुखी तेल था।
नेपाल रिफाइंड सोयाबीन तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। दस महीने की अवधि में नेपाल ने भारत को 5.99 लाख टन रिफाइंड तेल का निर्यात किया, जिसमें 5.32 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल था। नेपाल मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन तेल आयात कर उसे रिफाइन करने के बाद भारत को निर्यात करता है। SAFTA समझौते के तहत नेपाल से भारत आने वाले इन उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क है।
खाद्य तेल का कुल स्टॉक भी सितंबर की शुरुआत में बढ़ा है। 1 सितंबर 2026 को बंदरगाहों पर स्टॉक 11.03 लाख टन और फैक्ट्रियों, डिपो, वितरकों तथा खुदरा स्तर पर पाइपलाइन स्टॉक 9.40 लाख टन था। इस तरह कुल स्टॉक 20.43 लाख टन रहा, जो 1 अगस्त के 20.12 लाख टन से 31,000 टन अधिक है।
आयात लागत में बढ़ोतरी हालांकि चिंता का विषय बनी हुई है। अगस्त में भारतीय बंदरगाहों पर RBD पामोलीन की औसत CIF कीमत 1,215 डॉलर प्रति टन, कच्चे पाम तेल की 1,259 डॉलर, कच्चे सोयाबीन तेल की 1,289 डॉलर और कच्चे सूरजमुखी तेल की 1,496 डॉलर प्रति टन रही। अगस्त 2025 की तुलना में इनकी कीमतों में क्रमशः 10 प्रतिशत, 9 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। SEA के अनुसार, पिछले एक साल में भारतीय रुपया 9 प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ है। इससे आयातित खाद्य तेल की लैंडेड लागत बढ़ी है और आयातकों तथा रिफाइनरों पर लागत का दबाव बना हुआ है।
गैर-खाद्य तेलों के आयात में गिरावट दर्ज की गई। नवंबर 2025-अगस्त 2026 के दौरान इनका आयात 2.64 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 3.13 लाख टन से 16 प्रतिशत कम है।

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