भारत-ईयू एफटीए को मंजूरी के लिए यूरोपियन काउंसिल को भेजा गया, जानिए व्यापार में कैसे आएगा बदलाव
यूरोपीय आयोग ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मंजूरी के लिए यूरोपियन काउंसिल के पास भेज दिया है। प्रस्तावित समझौते से अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क घटेंगे, बाजार पहुंच बढ़ेगी और व्यापार नियम अधिक स्पष्ट होंगे। कृषि क्षेत्र में भारतीय चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को लाभ मिल सकता है।
यूरोपीय आयोग ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मंजूरी के लिए यूरोपीय संघ की परिषद के समक्ष भेज दिया है। आयोग ने 11 सितंबर 2026 को समझौते पर हस्ताक्षर और इसे अंतिम रूप देने के लिए परिषद से औपचारिक अनुमति मांगी। जनवरी 2026 में दोनों पक्षों के बीच एफटीए वार्ता पूरी हुई थी।
यदि परिषद से मंजूरी मिलती है, तो यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा। भारत ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा था। समझौते का उद्देश्य अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क कम या समाप्त करना, गैर-जरूरी व्यापार बाधाओं को दूर करना तथा व्यापार और निवेश के लिए अनुमान-योग्य नियम बनाना है।
भारत और ईयू के बीच वस्तुओं और सेवाओं का वार्षिक व्यापार 180 अरब यूरो से अधिक है और इससे ईयू में करीब 8 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। यूरोपीय आयोग के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत भारत में ईयू की 96 प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम किया जाएगा। इससे यूरोपीय उत्पादों पर सालाना करीब 4 अरब यूरो के शुल्क की बचत हो सकती है।
परिषद की मंजूरी के बाद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और इसे लागू करने के लिए यूरोपीय संसद की सहमति भी आवश्यक होगी। भारत में भी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आंतरिक प्रक्रियाएं चल रही हैं।
समझौते से कृषि व्यापार क्षेत्र में होने वाले बदलाव
कृषि क्षेत्र इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूरोपीय आयोग के अनुसार, 2024 में भारत को यूरोपीय संघ का कृषि-खाद्य निर्यात 1.3 अरब यूरो था, जो यूरोपीय संघ के कुल कृषि-खाद्य निर्यात का केवल 0.6 प्रतिशत है। भारत में कृषि-खाद्य उत्पादों पर औसत शुल्क करीब 36 प्रतिशत है और कुछ उत्पादों पर यह 150 प्रतिशत तक है।
प्रस्तावित समझौते के तहत जैतून तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों पर 45 प्रतिशत तक का शुल्क घटाकर शून्य किया जा सकता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे ब्रेड, बिस्किट, पास्ता और चॉकलेट पर 50 प्रतिशत तक के शुल्क को भी समाप्त करने का प्रस्ताव है। वाइन पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटकर प्रीमियम उत्पादों के लिए 20 प्रतिशत और मध्यम श्रेणी के लिए 30 प्रतिशत होगा, जबकि स्पिरिट पर अधिकतम 150 प्रतिशत शुल्क घटकर 40 प्रतिशत हो सकता है।
हालांकि, यूरोपीय संघ ने चीनी, चावल, चिकन, मिल्क पाउडर, शहद, केला, सॉफ्ट गेहूं, लहसुन और इथेनॉल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क उदारीकरण से बाहर रखा है। भारत ने भी डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील तथा कुछ फलों और सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा बनाए रखी है।
भारतीय पक्ष के अनुसार, चाय, कॉफी, मसाले, अंगूर, खीरा-ककड़ी, सूखा प्याज, ताजे फल-सब्जियों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। भारत को 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर प्राथमिकता वाला बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है, जो उसके निर्यात के 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में रुक गई थी। इसे 2022 में फिर शुरू किया गया। अक्टूबर 2025 में 14वां और अंतिम औपचारिक दौर पूरा हुआ, जिसके बाद तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर चर्चा जारी रही। भौगोलिक संकेतक (GI) और निवेश संरक्षण समझौते पर बातचीत अभी जारी है।

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