डेवलपमेंट के वादे के छह साल बाद भी आधुनिकीकरण की राह देख रही गाजीपुर फूल मंडी

दिल्ली की प्रमुख फूल व्यापार मंडी, गाजीपुर फूल मंडी खराब बुनियादी ढांचे और 2020 में घोषित पुनर्विकास योजना में देरी से जूझ रही है। 2023 से निर्वाचित चेयरमैन न होने से भी विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।

डेवलपमेंट के वादे के छह साल बाद भी आधुनिकीकरण की राह देख रही गाजीपुर फूल मंडी
गाजीपुर फूल मंडी में रोजाना सैकड़ों किस्म के फूलों का होता है कारोबार।

अभास आनंद/प्रिंसू

राजधानी दिल्ली का प्रमुख फूल व्यापार केंद्र, गाजीपुर फूल मंडी आधुनिकीकरण की घोषणा के छह वर्ष बाद भी खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रशासनिक अनिश्चितता और लंबित पुनर्विकास योजनाओं से जूझ रही है। व्यापारियों, मजदूरों और मंडी समिति के पूर्व सदस्यों का कहना है कि 2023 से निर्वाचित चेयरमैन का न होना और पुनर्विकास योजना पर स्पष्टता की कमी ने मंडी के भविष्य को असमंजस में डाल दिया है। रूरल वॉयस से बातचीत में कई व्यापारियों और श्रमिकों ने बताया कि मंडी वर्षों से बिना किसी बड़े संरचनात्मक सुधार के चल रही है, और डेवलपमेंट के वादे केवल कागजों तक सीमित हैं।

मंडी में फूल व्यापार की निगरानी करने वाली फ्लावर मार्केटिंग कमेटी (FMC) वर्ष 2023 से निर्वाचित चेयरमैन के बिना काम कर रही है। समिति के पूर्व सदस्य जयवीर सिंह ने कहा, “आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार मंडी में 400 से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, जबकि 1,500 से 2,000 मजदूर अपनी आजीविका के लिए इस मंडी पर निर्भर हैं।”

टिन शेड में काम करने को मजबूर व्यापारी और मजबूर।

2020 में घोषित हुई थी पुनर्विकास योजना

दिल्ली सरकार की 3 जून 1997 की अधिसूचना के अनुसार महरौली को फूलों का प्रधान बाजार (प्रिंसिपल यार्ड) और फतेहपुरी को उसकी सब्सिडियरी घोषित किया गया था। इसके बाद 12 मार्च 1998 की अधिसूचना के तहत कनॉट प्लेस को भी महरौली फूल बाजार का सब-यार्ड बनाया गया। फूल व्यापार को एक ही स्थान पर केंद्रित करने के उद्देश्य से 6 जून 2011 की अधिसूचना द्वारा इन तीनों अधिसूचित बाजारों को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली के गाजीपुर में 1.5 एकड़ क्षेत्र में अस्थायी फूल बाजार स्थापित किया गया। बाद में 1 अगस्त 2011 की अधिसूचना के तहत इसे फूल मार्केटिंग का प्रधान यार्ड घोषित किया गया।

करीब एक दशक बाद, 2020 में दिल्ली सरकार ने इस फूल बाजार को अधिक संगठित और आधुनिक सुविधा के रूप में विकसित करने की योजना की घोषणा की। हालांकि वित्तीय बाधाओं और बजटीय चुनौतियों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे व्यापारियों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। कई दुकानदारों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से स्पष्ट संवाद की कमी ने बाजार समुदाय में भ्रम और चिंता बढ़ा दी है। व्यापारियों का दावा है कि पिछले कई वर्षों से पुनर्विकास योजना को लेकर कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की गई है।

बेकार पड़ी है जमीन

व्यापारियों और मंडी समिति के पूर्व सदस्यों ने मंडी परिसर के भीतर लगभग 10 एकड़ भूमि का मुद्दा उठाया, जो अब तक पुनर्विकास प्रक्रिया से बाहर है। वर्तमान में करीब 1.5 एकड़ भूमि पर मंडी की नियमित गतिविधियां संचालित होती हैं, जबकि शेष खाली भूमि का उपयोग मुख्य रूप से पार्किंग और अस्थायी बाजार गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। हितधारकों का कहना है कि इस भूमि को 2020 में घोषित आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा बनाया जाना था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। व्यापारियों का मानना है कि भूमि का लंबित मामला विस्तार योजनाओं में बाधा बन रहा है।

मंडी क्षेत्र की खाली जगह, जिसे डेवलपमेंट के अभाव में पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

व्यापारियों के अनुसार यह फूल मंडी 2023 से कमेटी के निर्वाचित अध्यक्ष के बिना काम कर रही है, जिससे प्रशासनिक शून्यता की स्थिति पैदा हो गई है। चुनाव न होने के कारण मंडी की निगरानी फिलहाल दिल्ली एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (DAMB) द्वारा की जा रही है।

विदेशों से आते हैं फूल

बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद फिलहाल मंडी में व्यापार सामान्य रूप से जारी है। जयवीर सिंह के अनुसार मंडी में बिकने वाले कई विदेशी और आकर्षक फूल नीदरलैंड, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और चीन से आयात किए जाते हैं। व्यापारियों के मुताबिक, नीदरलैंड उच्च गुणवत्ता वाली लिली और पिनकुशन फूलों के लिए जाना जाता है, जबकि थाईलैंड ऑर्किड, हेलिकोनिया और लकी बैंबू का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। दक्षिण अफ्रीका से प्रोटिया, बैंक्सिया और हाइड्रेंजिया जैसी किस्में आती हैं, जबकि न्यूजीलैंड और चीन से डेजी, आइरिस और लिली जैसे मौसमी फूलों की सप्लाई होती है।

सबसे अधिक मांग वाले फूल

मंडी में सबसे अधिक कारोबार होने वाले फूलों में गेंदा प्रमुख है, जो बड़ी मात्रा में उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आता है। ये फूल मंदिरों में सजावट, धार्मिक आयोजनों, शादियों और त्योहारों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। मोगरा भी अपनी सुगंध के कारण अत्यधिक मांग वाला फूल है। इसे आसपास के राज्यों से लाया जाता है और इसका उपयोग शादियों के अलावा मालाओं और धार्मिक कार्यों में किया जाता है। रजनीगंधा का भी मंडी में बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। यह फूल और लंबे डंठल दोनों रूपों में बिकता है तथा विवाह मंडप में सजावट, पुष्प सज्जा और औपचारिक आयोजनों में लोकप्रिय है।

ग्राहकों को मंडी की इन्हीं गलियों से होकर खरीदारी करनी पड़ती है।

पारंपरिक फूलों के अलावा मंडी में कट-फ्लावर और सजावटी फूलों का भी बड़ा कारोबार होता है। लाल, गुलाबी और सफेद गुलाब बेंगलुरु, पुणे और स्थानीय फार्मों से आते हैं तथा गुलदस्तों और कार्यक्रमों में सजावट में इस्तेमाल किए जाते हैं। ग्लैडियोलस लंबे डंठलों और आकर्षक रूप के कारण मंच सजावट, फूलदानों और बड़े पुष्प प्रदर्शन में लोकप्रिय है। एस्टर फूल गुलदस्तों और सजावटी व्यवस्थाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

मंडी स्थित प्रिया फ्लावर्स के मालिक इमरान खान के अनुसार छोटे व्यापारी प्रतिदिन 1,000 से 2,000 रुपये तक कमाते हैं। वहीं जोशी फ्लावर्स जैसे बड़े व्यापारी सामान्य दिनों में 8,000 से 10,000 रुपये प्रतिदिन तक की आय अर्जित करते हैं।

जरा सी बारिश और मंडी में जगह-जगह कीचड़ हो जाता है।

मंडी में काम करने वालों की समस्याएं

गाजीपुर फूल मंडी की स्थापना किसानों के हितों की रक्षा करने, उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए एक स्थिर और संगठित मंच उपलब्ध कराने तथा आधुनिक मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि मंडी में कार्यरत मजदूरों का कहना है कि खराब जल निकासी, अपर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं और जगह की कमी जैसी बुनियादी समस्याएं रोजमर्रा के कामकाज में बाधा डालती हैं। त्योहारों और विवाह सीजन के दौरान जब फूलों की आवक और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं, ये समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं।

व्यापारियों ने मंडी के पुनर्विकास में लगातार हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि जब दिल्ली-एनसीआर में शादियों और त्योहारों के कारण फूलों की मांग लगातार बढ़ रही है, तब कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर मंडी की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है।

खराब और बिना बिके फूल इस तरह फेंक दिए जाते हैं।

हालांकि पुनर्विकास योजना की घोषणा 2020 में की गई थी, लेकिन अब तक इसकी प्रगति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मंडी की वेबसाइट भी लगभग निष्क्रिय दिखाई देती है। वेबसाइट पर उपलब्ध अंतिम अपडेट वर्ष 2024 का है। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) को मंडी रहने की सूचना देने वाला सर्कुलर 28 सितंबर 2024 को जारी किया गया था। मंडी में प्राइस लिस्ट भी 25 जनवरी 2019 के बाद से अपडेट नहीं की गई है।

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