2035 तक भारत में गेहूं की खपत उत्पादन से अधिक हो जाएगी, एथेनॉल उत्पादन दोगुना होने का अनुमान: OECD-FAO
OECD-FAO एग्रीकल्चरल आउटलुक 2026-2035 के अनुसार, वर्ष 2035 तक भारत में अनाज, दलहन, तिलहन, चीनी, कपास, पोल्ट्री, मत्स्य और जैव ईंधन के उत्पादन में लगातार वृद्धि होने का अनुमान है। इस विस्तार का प्रमुख कारण घरेलू मांग में बढ़ोतरी होगी। खास बात यह है कि दस वर्षों के बाद गेहूं की खपत, इसके घरेलू उत्पादन से अधिक हो जाएगी। चावल, मछली और कपास जैसी चुनिंदा कृषि जिंसों के निर्यात में भी मजबूती आने की संभावना है।
भारत के कृषि क्षेत्र में अगले एक दशक के दौरान प्रमुख फसलों, पशुपालन और जैव ईंधन क्षेत्रों में निरंतर वृद्धि होने का अनुमान है। OECD-FAO एग्रीकल्चरल आउटलुक 2026-2035 के अनुसार, घरेलू मांग में लगातार वृद्धि के कारण खाद्यान्न, दलहन, खाद्य तेल, चीनी, पोल्ट्री, मत्स्य और एथेनॉल का उत्पादन बढ़ेगा। हालांकि भारत के चावल, मछली और कपास का प्रमुख निर्यातक बने रहने की संभावना है, लेकिन खाद्य तेलों तथा कुछ हद तक दलहनों के मामले में आयात पर निर्भरता बनी रहने का अनुमान है।
गेहूं की खपत उत्पादन से अधिक बढ़ेगी
भारत में गेहूं का उत्पादन वर्ष 2023-25 के औसत 1,137.84 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 1,350.49 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं घरेलू खपत 1,124.76 लाख टन से बढ़कर 1,353.37 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है, जो खाद्य मांग में लगातार वृद्धि को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि वर्ष 2035 तक देश में गेहूं की घरेलू खपत, उत्पादन से अधिक हो जाएगी।
आउटलुक के अनुसार, वर्ष 2035 तक वैश्विक गेहूं उत्पादन में होने वाली वृद्धि का लगभग 29 प्रतिशत योगदान अकेले भारत का होगा। इसका प्रमुख कारण उत्पादकता (यील्ड) में वृद्धि होगी। गेहूं के रकबे में सीमित विस्तार भी इसमें योगदान देगा। अनुमान अवधि के अंत तक चीन, भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक गेहूं उत्पादन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पैदा करेंगे, जिससे कुछ प्रमुख उत्पादक देशों में गेहूं उत्पादन का और अधिक केंद्रीकरण दिखाई देगा।
हालांकि, भारत में गेहूं उत्पादन में होने वाली अतिरिक्त वृद्धि का अधिकांश हिस्सा घरेलू मांग पूरी करने में ही खर्च हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान मिलकर वैश्विक गेहूं खपत में होने वाली वृद्धि का लगभग एक-तिहाई हिस्सा योगदान देंगे। इसका कारण जनसंख्या वृद्धि और गेहूं का प्रमुख खाद्य पदार्थ बने रहना है।
घरेलू खपत बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय गेहूं व्यापार में भूमिका सीमित रहेगी। गेहूं का निर्यात 2.58 लाख टन से घटकर केवल 93 हजार टन रहने का अनुमान है, जबकि आयात लगभग 1.11 लाख टन के स्तर पर स्थिर रहने की संभावना है।
चावल निर्यात में अव्वल बना रहेगा भारत
भारत में चावल का उत्पादन 1,461.69 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 1,711.62 लाख टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में घरेलू खपत 1,213.67 लाख टन से बढ़कर 1,352.21 लाख टन तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक वैश्विक चावल उत्पादन में होने वाली वृद्धि का आधे से अधिक योगदान अकेले भारत का होगा। इससे भारत विश्व में अतिरिक्त चावल आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत बन जाएगा। कई प्रमुख उत्पादक देशों में चावल का रकबा घटने का अनुमान है। लेकिन भारत में इसके रकबे में वृद्धि चीन, वियतनाम, ब्राजील और पाकिस्तान में घटते रकबे की भरपाई करेगी। साथ ही उत्पादकता में सुधार से उत्पादन और बढ़ेगा।
चावल का निर्यात 202.06 लाख टन से बढ़कर 368.93 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे विश्व के सबसे बड़े चावल निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। वहीं चावल का आयात नगण्य रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक वैश्विक चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसका दबदबा और मजबूत होगा। थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और अमेरिका भी प्रमुख निर्यातक बने रहेंगे, लेकिन उनके निर्यात का स्तर भारत के बराबर पहुंचने की संभावना नहीं है।
भारत में प्रमुख कृषि जिंसों के उत्पादन और खपत का अनुमान
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कमोडिटी |
उत्पादन 2023-25 |
उत्पादन 2035 |
खपत 2023-25 |
खपत 2035 |
|
गेहूं |
1137.84 |
1350.49 |
1124.76 |
1353.37 |
|
चावल |
1461.69 |
1711.62 |
1213.67 |
1352.21 |
|
मक्का |
406.49 |
513.86 |
401.71 |
508.21 |
|
मोटे अनाज |
189.79 |
240.68 |
191.42 |
241.81 |
|
दलहन |
259.60 |
307.23 |
- |
- |
|
सोयाबीन |
141.14 |
160.19 |
147.24 |
189.71 |
|
अन्य तिलहन |
207.56 |
249.65 |
203.52 |
247.43 |
|
वनस्पति तेल |
123.19 |
150.88 |
294.70 |
359.95 |
|
चीनी |
297.44 |
359.27 |
288.05 |
367.56 |
|
पोल्ट्री मीट |
52.22 |
74.10 |
52.14 |
74.09 |
|
अंडे |
80.95 |
136.20 |
- |
- |
|
मछली, सी-फूड |
183.10 |
209.93 |
159.97 |
181.34 |
|
दूध |
2474.77 |
3805.86 |
- |
- |
|
कपास |
53.10 |
64.18 |
55.17 |
65.61 |
|
एथेनॉल (अरब ली) |
9.124 |
19.197 |
9.545 |
20.552 |
(आंकड़े लाख टन में, स्रोतः OECD FAO Agricultural Outlook 2026-2035)
मक्का और मोटे अनाज के उत्पादन में वृद्धि होगी
भारत में मक्का का उत्पादन वर्ष 2023-25 के 406.49 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 513.86 लाख टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में इसकी घरेलू खपत 401.71 लाख टन से बढ़कर 508.21 लाख टन तक पहुंच सकती है। हालांकि मक्का का निर्यात 10.33 लाख टन से घटकर 8.82 लाख टन रहने का अनुमान है।
वैश्विक स्तर पर मक्का सभी प्रमुख अनाजों में सबसे तेज उत्पादन वृद्धि दर्ज करेगा। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक विश्व मक्का उत्पादन लगभग 17.1 करोड़ टन बढ़कर 1.43 अरब टन तक पहुंच जाएगा। इसका मुख्य कारण पशु आहार तथा एथेनॉल उत्पादन जैसे औद्योगिक उपयोगों की बढ़ती मांग होगी।
भारत में अन्य मोटे अनाजों का उत्पादन 189.79 लाख टन से बढ़कर 240.68 लाख टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में इनकी खपत 191.42 लाख टन से बढ़कर 241.81 लाख टन तक पहुंच सकती है।
दलहन का उत्पादन 300 लाख टन के पार पहुंचेगा
भारत में दलहन का उत्पादन वर्ष 2023-25 के दौरान औसतन 259.60 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 307.23 लाख टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति दलहन की खपत 14.5 किलोग्राम से बढ़कर 15.3 किलोग्राम होने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक दलहन खपत में भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी रहेगी। भारतीय भोजन में दलहन सस्ते और महत्वपूर्ण प्रोटीन स्रोत के रूप में अपनी प्रमुख भूमिका बनाए रखेगा।
हालांकि उत्पादन बढ़ेगा, फिर भी भारत दलहन का आयात जारी रखेगा। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भारत के प्रमुख दलहन आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे। रूस और पूर्वी अफ्रीका के कई देशों की वैश्विक दलहन निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है।
डेयरी उत्पादन में भारत का वैश्विक नेतृत्व और मजबूत होगा
भारत के वर्ष 2035 तक दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बने रहने और अपनी स्थिति को और मजबूत करने का अनुमान है। आउटलुक के अनुसार, इस अवधि में भारत का दूध उत्पादन वैश्विक औसत से अधिक तेजी से बढ़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, दूध उत्पादन में अधिकांश वृद्धि दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ने तथा उनकी उत्पादकता में सुधार से होगी। बेहतर प्रजनन, पोषण प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य सेवाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
जहां कई विकसित देशों में डेयरी उत्पादों की मांग स्थिर हो चुकी है, वहीं भारत में जनसंख्या वृद्धि, आय में बढ़ोतरी तथा मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण दूध की खपत लगातार बढ़ने का अनुमान है।
वैश्विक स्तर पर दूध उत्पादन में वृद्धि का नेतृत्व भारत और पाकिस्तान करेंगे, जबकि यूरोपीय संघ, अमेरिका और न्यूजीलैंड मक्खन, पनीर, स्किम्ड मिल्क पाउडर और होल मिल्क पाउडर के प्रमुख निर्यातक बने रहेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्य रूप से घरेलू मांग पूरी करने पर केंद्रित है। इसलिए न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका की तुलना में वैश्विक डेयरी निर्यात में भारत की भागीदारी सीमित रहने की संभावना है।
सोयाबीन, तिलहन और खाद्य तेलों का उत्पादन
भारत में सोयाबीन का उत्पादन वर्ष 2023-25 के 141.14 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 160.19 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं घरेलू खपत 147.24 लाख टन से बढ़कर 189.71 लाख टन तक पहुंच सकती है। बढ़ती मांग के कारण आयात में वृद्धि होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, आयात 5.6 लाख टन से बढ़कर लगभग 2.97 लाख टन तक पहुंच सकता है।
अन्य तिलहनों का उत्पादन भी 207.56 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 249.65 लाख टन होने का अनुमान है।
घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद भारत की खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता बनी रहने की संभावना है। अगले दशक में भारत वनस्पति (खाद्य) तेलों का दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं और आयातकों में शामिल रहेगा, क्योंकि घरेलू मांग, उत्पादन की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ेगी।
वनस्पति तेलों का उत्पादन 123.19 लाख टन से बढ़कर 150.88 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि खपत इससे अधिक तेजी से बढ़कर 294.70 लाख टन से 359.95 लाख टन तक पहुंच सकती है। इसके परिणामस्वरूप खाद्य तेलों का आयात 170.40 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 211.48 लाख टन होने का अनुमान है।
चीनी उत्पादन में वृद्धि होगी
भारत में चीनी का उत्पादन वर्ष 2023-25 के दौरान औसतन 297.44 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 359.27 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं घरेलू खपत 288.05 लाख टन से बढ़कर 367.56 लाख टन तक पहुंच सकती है।
चीनी का निर्यात घटकर 13.33 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि आयात मामूली वृद्धि के साथ 24.35 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है। इसी अवधि में गन्ने का उत्पादन 3,880.83 लाख टन से बढ़कर 5,633.87 लाख टन होने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादकता में सुधार और बेहतर कृषि प्रबंधन के कारण भारत में गन्ना उत्पादन लगातार बढ़ेगा। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में गन्ने का एक बड़ा हिस्सा देश के जैव ईंधन कार्यक्रम के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके कारण चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने का अनुपात कम होगा।
इसके बावजूद भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और उपभोक्ताओं में बना रहेगा। जनसंख्या वृद्धि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार से घरेलू मांग बढ़ेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चीनी निर्यात बाजार में ब्राजील का दबदबा कायम रहेगा। इसकी वजह वहां का अत्यधिक प्रतिस्पर्धी गन्ना उद्योग और ऐसी प्रसंस्करण क्षमता है, जिससे मिलें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार चीनी और एथेनॉल के बीच उत्पादन बदल सकती हैं।
थाईलैंड भी प्रमुख चीनी निर्यातक बना रहेगा, जबकि एशिया और अफ्रीका के कई देश अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए चीनी आयात पर निर्भर रहेंगे।
पोल्ट्री, अंडा और मत्स्य उत्पादन में निरंतर वृद्धि होगी
भारत में पोल्ट्री मीट का उत्पादन वर्ष 2023-25 के दौरान 52.22 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 74.10 लाख टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में इसकी घरेलू खपत भी लगभग इसी गति से बढ़ेगी। अंडा उत्पादन 80.95 लाख टन से बढ़कर 136.20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
मछली और समुद्री खाद्य (सी-फूड) का उत्पादन 183.10 लाख टन से बढ़कर 209.93 लाख टन होने की संभावना है। वहीं निर्यात 16.52 लाख टन से बढ़कर 20.15 लाख टन तक पहुंच सकता है, जिससे कृषि निर्यात में इस क्षेत्र का योगदान और मजबूत होगा।
फलों की खपत निर्यात से अधिक तेजी से बढ़ेगी
भारत के तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग के कारण अगले दशक में ताजे फलों, प्रसंस्कृत फल उत्पादों तथा मूल्यवर्धित बागवानी उत्पादों की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आय में वृद्धि और स्वस्थ आहार के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण उपभोक्ताओं की पसंद फलों और सब्जियों की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते घरेलू मांग केवल जनसंख्या वृद्धि की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ेगी।
इसके परिणामस्वरूप भारत में फलों के अतिरिक्त उत्पादन का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में ही खप जाएगा। हालांकि फलों के निर्यात में धीरे-धीरे वृद्धि होगी, लेकिन घरेलू मांग अधिक रहने के कारण वैश्विक फल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित रहेगी।
लैटिन अमेरिका के देश, विशेष रूप से इक्वाडोर, चिली, पेरू और मेक्सिको, प्रमुख फल निर्यातकों में बने रहेंगे, जबकि यूरोपीय संघ और अमेरिका बड़े आयात बाजार बने रहेंगे।
कपास और जैव ईंधन का उत्पादन
भारत में कपास का उत्पादन 53.10 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2035 तक 64.18 लाख टन होने का अनुमान है। घरेलू खपत 55.17 लाख टन से बढ़कर 65.61 लाख टन तक पहुंच सकती है, जबकि कपास का निर्यात बढ़कर 3.89 लाख टन होने की संभावना है।
चीन, अमेरिका, ब्राजील और पाकिस्तान के साथ भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल बना रहेगा। बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाओं और कृषि प्रबंधन में सुधार से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, हालांकि मौसम में अनिश्चितता का जोखिम बना रहेगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उपभोक्ताओं में भी शामिल रहेगा क्योंकि यहां का वस्त्र और परिधान उद्योग काफी बड़ा है। इसलिए देश में उत्पादित अधिकांश कपास की खपत घरेलू स्तर पर ही हो जाएगी, जिससे घरेलू मांग अधिक रहने वाले वर्षों में निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा सीमित रहेगी।
जैव ईंधनों में एथेनॉल सबसे तेज वृद्धि दर्ज करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-25 के दौरान 9.12 अरब लीटर रहे एथेनॉल उत्पादन के वर्ष 2035 तक बढ़कर 19.19 अरब लीटर से अधिक होने का अनुमान है। वहीं ईंधन के रूप में एथेनॉल का उपयोग 7.6 अरब लीटर से बढ़कर 18.56 अरब लीटर तक पहुंच सकता है। बायोडीजल उत्पादन भी वर्ष 2035 तक 44.8 करोड़ लीटर से बढ़कर 1.06 अरब लीटर होने का अनुमान है।
विश्व अनाज उत्पादन में वृद्धि होगी
OECD-FAO एग्रीकल्चरल आउटलुक 2026-2035 के अनुसार, वर्ष 2035 तक वैश्विक अनाज उत्पादन लगभग 38.5 करोड़ टन बढ़कर लगभग 3.38 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है। इस अतिरिक्त उत्पादन में लगभग 76 प्रतिशत योगदान उत्पादकता (यील्ड) में सुधार, 15 प्रतिशत रकबे के विस्तार, जबकि शेष योगदान क्रॉपिंग इंटेंसिटी बढ़ने से आएगा।
अगले दशक में वैश्विक अनाज खपत भी लगातार बढ़ने का अनुमान है और वर्ष 2035 तक यह लगभग 3.25 अरब टन तक पहुंच सकती है। इस वृद्धि में आधे से अधिक योगदान एशिया का होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, खाद्यान्न की कमी और अधिशेष वाले क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय अनाज व्यापार की भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। वर्ष 2035 तक वैश्विक अनाज उत्पादन का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल होने का अनुमान है, जबकि वर्तमान में यह लगभग 17 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा की नींव आगे भी अनाज ही बने रहेंगे। मक्का, गेहूं और चावल वैश्विक उत्पादन और खपत का सबसे बड़ा हिस्सा बने रहेंगे। चीन और अमेरिका कई प्रमुख अनाज बाजारों में अपना प्रभुत्व बनाए रखेंगे, वहीं भारत विशेष रूप से चावल और गेहूं के क्षेत्र में वैश्विक अनाज आपूर्ति में अपना योगदान और मजबूत करेगा।

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