उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून की एंट्री, लेकिन देश में 2014 के बाद सबसे सूखा जून
लगभग तीन सप्ताह की सुस्ती के बाद मानसून ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रवेश कर लिया है, लेकिन देश के लिए जून 2026 पिछले एक दशक का सबसे सूखा जून साबित हुआ। सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुआई भी 23 प्रतिशत पीछे चल रही है
लगभग तीन सप्ताह तक धीमी प्रगति के बाद मानसून आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रवेश कर गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 30 जून को मानसून मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष भागों, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया। हालांकि, जून का महीना सामान्य से 39.8 प्रतिशत कम बारिश के साथ 2014 के बाद सबसे सूखा जून रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, 3 जुलाई 2026 के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से इस सप्ताह देश के मध्य भागों में मानसून सक्रिय रहने की उम्मीद है।
अगले दो से तीन दिनों के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के शेष हिस्सों, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के अधिकांश भागों तथा राजस्थान के कुछ इलाकों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
मौसम विभाग ने 2 से 4 जुलाई के दौरान कोंकण, 2 और 3 जुलाई को मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों तथा 3 और 4 जुलाई 2026 को दक्षिण गुजरात में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
जून में सूखे की मार
इस साल जून माह में देशभर में लगभग 99.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2014 के बाद जून महीने में दर्ज की गई सबसे कम बारिश है। जून के दौरान देश में सामान्य वर्षा (1971-2020 का औसत) 165.3 मिमी मानी जाती है। इस तरह इस वर्ष जून में सामान्य की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, देश के कुल 741 जिलों में से लगभग 70 प्रतिशत जिलों में 1 जून से 29 जून के बीच सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। जून में सामान्य से काफी कम वर्षा के पीछे अल नीनो के प्रभाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
पिछले लगभग सवा सौ वर्षों के दौरान जून में सबसे कम बारिश 2009 में 87.5 मिमी दर्ज की गई थी। वहीं, अल नीनो प्रभाव वाले वर्ष 2014 में जून के दौरान 92.1 मिमी बारिश हुई थी।
क्षेत्रवार देखें तो एक से 20 जून के दौरान मध्य भारत में सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 40 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 31 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। दक्षिण भारत में भी सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश हुई। राज्यों में गुजरात में सामान्य से 82 फीसदी कम, मेघालय में 74 फीसदी कम और छत्तीसगढ़ में 65 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।

खरीफ की बुआई में 23 प्रतिशत की कमी
मानसून में देरी के कारण देश में धान समेत खरीफ फसलों की बुआई काफी पीछे चल रही है। 25 जून तक खरीफ फसलों की बुआई का कुल रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक वर्ष पहले की समान अवधि के 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है।
धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास—सभी प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम दर्ज की गई है।


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