वैश्विक गेहूं उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर रहने की उम्मीद, लेकिन ईरान युद्ध से बढ़ती लागत और बुवाई पर अनिश्चितता

FAO के मार्च के अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक गेहूं उत्पादन 82 करोड़ टन रहने की संभावना है। यह पिछले साल से तो थोड़ा कम है लेकिन पांच साल के औसत से अधिक है। हालांकि ईरान युद्ध ऊर्जा और उर्वरकों की लागत बढ़ा रहा है, जिससे भविष्य की बुवाई को लेकर अनिश्चितता है। बढ़ती लागत किसानों के फैसलों और बाजार की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

वर्ष 2026 के लिए वैश्विक गेहूं उत्पादन की संभावनाएं कुल मिलाकर अनुकूल बनी हुई हैं, हालांकि ईरान युद्ध के चलते इनपुट लागत में वृद्धि और बुवाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह आकलन खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ताजा रिपोर्ट में किया गया है। चूंकि 2026 के सीजन की अधिकांश गेहूं फसल पहले ही बोई जा चुकी है और कई क्षेत्रों में कटाई नजदीक है, FAO ने अपने वैश्विक उत्पादन अनुमान को 82 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 1.7 प्रतिशत कम है, लेकिन उत्पादन पांच वर्षीय औसत से ऊपर रहने की उम्मीद है।

हालांकि, युद्ध तेज होने से नए जोखिम जुड़ गए हैं। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से उर्वरक और परिवहन लागत बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान अनिश्चितता को और बढ़ा रहे हैं। ये दबाव विशेष रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्प्रिंग गेहूं फसलों और दक्षिणी गोलार्ध के उन देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां अभी बुवाई बाकी है। बढ़ती इनपुट लागत और अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों के कारण लाभ मार्जिन में कमी भी किसानों के बुवाई फैसलों को प्रभावित कर सकती है, खासकर मक्का के मामले में। उत्पादक ऐसी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं जिनमें कम उर्वरकों की जरूरत पड़ती है।

भारत में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद

क्षेत्रीय स्तर पर उत्पादन रुझान अलग-अलग हैं। अधिक बुवाई, अनुकूल शुरुआती मौसम और पर्याप्त सिंचाई के कारण भारत में 12 करोड़ टन के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की संभावना है। पाकिस्तान और चीन में भी उत्पादन ऐतिहासिक औसत से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है।

यूरोपीय संघ में गेहूं उत्पादन लगभग 13.7 करोड़ टन रहने का अनुमान है। सर्दियों की बुवाई में कमी और पिछले वर्ष के उच्च स्तर के बाद सामान्य पैदावार लौटने के कारण यह थोड़ा कम है। इसके विपरीत, इंग्लैंड में अनुकूल मौसम परिस्थितियों से उत्पादन 1.3 करोड़ टन से अधिक होने की उम्मीद है।

रूस में अनुकूल मौसम के बावजूद कम बुवाई क्षेत्र के कारण उत्पादन घटने की संभावना है। यूक्रेन में गेहूं उत्पादन 2.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के तो बराबर है लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के पूर्व स्तर से काफी कम है। अमेरिका में कम बुवाई और सूखे की चिंताओं के कारण उत्पादन घटकर लगभग 5.1 करोड़ टन रहने की संभावना है, हालांकि यह पांच साल के औसत से ऊपर है।

अन्य क्षेत्रों में, ईरान में बेहतर वर्षा और तुर्किये में सर्दियों की नमी फसल के लिए अनुकूल माहौल बना रही है। उत्तरी अफ्रीका में दो वर्षों के सूखे के बाद उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।

मक्का: ब्राजील में औसत से अधिक उत्पादन की उम्मीद

मक्का के मामले में, दक्षिणी गोलार्ध के देशों में कटाई जारी है। ब्राजील में अनुकूल मौसम और मजबूत निर्यात मांग के चलते औसत से अधिक उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि यह पिछले वर्ष के रिकॉर्ड से कम रह सकता है। अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका में भी औसत से अधिक उत्पादन का अनुमान है।

FAO ने बढ़ाया वैश्विक अनाज उत्पादन का अनुमान

एफएओ ने 2025 के लिए वैश्विक अनाज उत्पादन अनुमान बढ़ाकर 303.6 करोड़ टन कर दिया है, जो साल-दर-साल 5.8 प्रतिशत अधिक है। 2025-26 में वैश्विक चावल उत्पादन 56.33 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। इसमें भारत, चीन और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख उत्पादकों की भूमिका रहेगी।

वैश्विक अनाज खपत 294.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि भंडार 95.15 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं। इससे स्टॉक-टू-यूज अनुपात 32.2 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। वैश्विक अनाज व्यापार 50.53 करोड़ टन रहने का अनुमान है। सकारात्मक आपूर्ति परिदृश्य के बावजूद FAO ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी बढ़ती इनपुट लागत भविष्य के उत्पादन फैसलों और बाजार स्थिरता पर असर डाल सकती है।