ईरानी मूल के यूएन वैज्ञानिक कावेह मदानी को ‘वॉटर बैंकरप्सी’ शोध के लिए 2026 का स्टॉकहोम वाटर पुरस्कार

ईरान में जन्मे संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिक कावेह मदानी को जल प्रबंधन और वैश्विक स्तर पर उनके प्रभावशाली कार्य के लिए 2026 का स्टॉकहोम वाटर प्राइज मिला है। कभी “वॉटर टेररिस्ट” कहे गए मदानी का संघर्षपूर्ण सफर और “वॉटर बैंकरप्सी” की अवधारणा दुनिया में जल संकट की समझ को बदल रही है।

वैज्ञानिक उत्कृष्टता और असाधारण संघर्ष की प्रेरणा, ईरानी मूल के कावेह मदानी को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित स्टॉकहो वाटर प्राइज (Stockholm Water Prize) देने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार को “पानी का नोबेल पुरस्कार” भी कहा जाता है। मदानी इस समय संयुक्त राष्ट्र की यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरमेंट एंड हेल्थ के निदेशक हैं।

यह घोषणा पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में की गई। यह पुरस्कार औपचारिक रूप से अगस्त 2026 में विश्व जल सप्ताह के दौरान किंग कार्ल XVI गुस्ताफ द्वारा प्रदान किया जाएगा।

महज 44 वर्ष की आयु में मदानी इस पुरस्कार के 35 साल के इतिहास में सबसे कम उम्र के विजेता बन गए हैं। साथ ही, वे पहले संयुक्त राष्ट्र अधिकारी और पूर्व राजनेता हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। उनका जीवन सफर विज्ञान, राजनीति और पर्यावरणीय संघर्ष के अनोखे संगम को दर्शाता है।

1981 में तेहरान में जन्मे मदानी के जीवन पर जल संकट की समस्याओं का गहरा प्रभाव रहा। उन्होंने ईरान, स्वीडन और अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक अग्रणी विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाई। उनका प्रमुख योगदान गेम थ्योरी और हाइड्रोलॉजी को जोड़कर मानव व्यवहार को समझने का एक नया दृष्टिकोण विकसित करना है, जिसने वैश्विक नीति निर्माण को प्रभावित किया है।

वर्ष 2017 में मदानी ईरान लौटे और पर्यावरणीय पद पर कार्यभार संभाला। लेकिन जल प्रबंधन में पारदर्शिता और सुधारों की उनकी पहल से सत्ता के कुछ वर्गों में असंतोष पैदा हुआ। उन्हें “वॉटर टेररिस्ट” और जासूस तक कहा गया, गिरफ्तार किया गया और पूछताछ का सामना करना पड़ा। अंततः 2018 में उन्हें देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा।

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद मदानी ने अपने शोध और वैश्विक कार्य को जारी रखा और बाद में संयुक्त राष्ट्र के जल थिंक टैंक माने जाने वाले UNU-INWEH के प्रमुख बने। आज वे दुनिया भर की सरकारों को जल प्रबंधन और नीतिगत सुधारों पर सलाह दे रहे हैं।

उनकी सबसे चर्चित अवधारणाओं में से एक “वॉटर बैंकरप्सी” है। उन्होंने “जल संकट” शब्द को चुनौती देते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में पानी की कमी अब अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी और अपरिवर्तनीय बन चुकी है। उनकी हालिया संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 से दुनिया “ग्लोबल वॉटर बैंकरप्सी” के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिससे वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है।

मदानी ने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत कर उन्हें आम लोगों तक पहुंचाया है। सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों के माध्यम से उन्होंने जल संकट को जन-आंदोलन का विषय बनाया और नई पीढ़ी को जागरूक किया। उनकी कूटनीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। ईरान के पर्यावरणीय राजनयिक के रूप में उन्होंने वैश्विक जल मुद्दों को जलवायु वार्ताओं के केंद्र में लाने की वकालत की।

इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए मदानी ने इसे “सत्य की जीत” बताया और इसे अपने समर्थकों व उन पर्यावरण कार्यकर्ताओं को समर्पित किया जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने उनके कार्य को विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। 1991 में शुरू किया गया स्टॉकहोम वाटर प्राइज जल संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।