अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण वैश्विक बाजार में सोयाबीन तेल (soyabeab oil prices) की कीमतें बढ़ी हैं। इससे सोयाबीन की कीमतों में भी तेजी का रुख बना हुआ है। सोयाबीन तेल की कीमतें 1,100 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गई हैं। इस समय सौदे 1,080 डॉलर से 1,150 डॉलर प्रति टन के बीच हो रहे हैं। दाम इस वर्ष की शुरुआत में 1,000 डॉलर प्रति टन से नीचे चले गए थे। हालांकि मौजूदा भाव मई 2022 के उस रिकॉर्ड स्तर से कम हैं, जब कीमतें 1,800 डॉलर प्रति टन को पार कर गई थीं।
इस वर्तमान तेजी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता तनाव है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में शिपिंग को लेकर उत्पन्न खतरे ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिसका असर ऊर्जा से जुड़े अन्य कमोडिटी बाजारों, विशेषकर सोयाबीन तेल पर भी पड़ा है।
बायोडीजल के लिए एक प्रमुख कच्चा माल होने के कारण सोयाबीन तेल की कीमतें आमतौर पर कच्चे तेल के साथ चलती हैं। जैसे-जैसे ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, बायोफ्यूल विकल्पों की मांग भी मजबूत होती है। इसी का असर है कि इन दिनों सोयाबीन तेल की कीमतें बढ़ी हैं।
बेंचमार्क सोयाबीन कीमतों में भी हाल के हफ्तों में तेजी देखी गई है, क्योंकि कच्चा तेल आधारित इस रैली ने बड़े वैश्विक भंडार जैसे कारकों के प्रभाव को कम किया है। फिलहाल सोयाबीन तेल की मजबूती का पूरे तिलहन बाजार पर प्रभाव दिख रहा है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी की स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर सोयाबीन के बड़े भंडार और खासकर चीन जैसे बड़े खरीदारों की तरफ से मांग में सुस्ती आगे कीमतों में बढ़त को सीमित कर सकती है। इसके अलावा, यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है, जिससे सोयाबीन तेल में आई तेजी भी पलट सकती है।