लगातार दो वर्षों तक ला नीना के प्रभाव में रहने के बाद प्रशांत महासागर में अल नीनो का विकास अभूतपूर्व गति से हो रहा है। इससे वैश्विक तापमान, चरम मौसमी घटनाओं, कृषि, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कार्बन ब्रीफ की नई रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे तेज गति से मजबूत हुआ है और अब इसके अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो बनने की आशंका है। इसके कारण 2026 और 2027 में वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की आशंका काफी बढ़ गई है। विशेष रूप से 2027 मानव इतिहास का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के Niño3.4 इंडेक्स ने 0.5 डिग्री सेल्सियस का स्तर पार कर लिया, जिससे आधिकारिक तौर पर अल नीनो की शुरुआत हुई। इसके बाद तापमान बेहद तेजी से बढ़ा और मई में 1 डिग्री सेल्सियस तथा जून में 1.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इसे "सशक्त (Strong) अल नीनो" की श्रेणी में ले गया। जुलाई के शुरुआती हफ्तों में यह सूचकांक 2 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर निकल गया, जिसे वैज्ञानिक "बहुत शक्तिशाली" या "सुपर अल नीनो" की श्रेणी मानते हैं। अल नीनो की परिस्थिति इतनी तेज गति से पहले कभी विकसित नहीं हुई।
इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बनने की आशंका
यह अध्ययन दुनिया की 14 प्रमुख जलवायु पूर्वानुमान संस्थाओं द्वारा तैयार 667 मॉडल सिमुलेशन पर आधारित है। इनमें अमेरिका की क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (CFS), यूरोप की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S), नॉर्थ अमेरिकन मल्टी-मॉडल एनसेंबल (NMME), कनाडा की CanSIPS तथा जापान की SINTEX-F जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
इन सभी मॉडलों के औसत (मीडियन) अनुमान के अनुसार, जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच Niño3.4 इंडेक्स क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.59 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है। अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो 2015-16 का था, जिसमें यह तापमान लगभग 2.75 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। यदि महासागरों के दीर्घकालिक तापमान वृद्धि के प्रभाव को हटाकर रिलेटिव ओशेनिक नीनो इंडेक्स (RONI) के आधार पर देखा जाए, तब भी अनुमानित अधिकतम तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस है, जो 1982-83 के रिकॉर्ड 2.69 डिग्री सेल्सियस से काफी अधिक है।
91 प्रतिशत मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि 2026 का अल नीनो आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली होगा। वहीं दीर्घकालिक वैश्विक तापवृद्धि का प्रभाव हटाने के बाद भी 77 प्रतिशत मॉडल नए रिकॉर्ड की संभावना जता रहे हैं। जून के बाद के पूर्वानुमान अपेक्षाकृत अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं। इसलिए मौजूदा अनुमान पर वैज्ञानिकों का भरोसा काफी बढ़ गया है।
2026 के सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना दोगुनी हुई
अल नीनो के तेजी से मजबूत होने के कारण 2026 के वैश्विक तापमान को लेकर अनुमान भी काफी बदल गए हैं। कार्बन ब्रीफ ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि 2026 के अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना 19 प्रतिशत है। लेकिन अब यह संभावना बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट का केंद्रीय अनुमान है कि 2026 वैश्विक स्तर पर औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में लगभग 1.51 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहेगा, जिससे यह 2024 के बाद दूसरा सबसे गर्म वर्ष बन सकता है। 2026 का औसत वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने की संभावना 63 प्रतिशत है। यदि ऐसा होता है तो 2024 के बाद 2026 दूसरा कैलेंडर वर्ष होगा, जिसमें वैश्विक औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहेगा।
हालांकि वैज्ञानिक मानाते हैं कि किसी एक वर्ष का 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चले जाना पेरिस समझौते के लक्ष्य के उल्लंघन का प्रमाण नहीं माना जाता, क्योंकि यह लक्ष्य लगभग 20 वर्षों के औसत तापमान के आधार पर तय किया जाता है।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि 2026 के सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना में वृद्धि का मुख्य कारण इस वर्ष का वास्तविक तापमान नहीं, बल्कि लगातार मजबूत होता अल नीनो है। 2026 की पहली छमाही में वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर की तुलना में लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जिससे यह रिकॉर्ड में तीसरी सबसे गर्म शुरुआत बनी। इससे अधिक गर्म केवल 2024 और 2025 रहे थे।
जनवरी अपेक्षाकृत कम गर्म रहा क्योंकि उस समय तक ला नीना का असर बना हुआ था। लेकिन अल नीनो के विकसित होने के साथ मई और जून दोनों ही रिकॉर्ड के दूसरे सबसे गर्म महीने बन गए। मार्च के बाद 2026 के सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना में जितनी वृद्धि हुई है, उसका लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा केवल अल नीनो के अधिक शक्तिशाली होने के अनुमान के कारण है।
2027 बन सकता है सबसे गर्म वर्ष
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सुपर अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव 2026 में नहीं बल्कि 2027 में देखने को मिल सकता है। आमतौर पर अल नीनो के प्रभाव से वैश्विक तापमान में वृद्धि लगभग तीन महीने की देरी से दिखाई देती है, क्योंकि प्रशांत महासागर की अतिरिक्त ऊष्मा को पूरे वातावरण में फैलने में समय लगता है। इसलिए यदि अल नीनो नवंबर-दिसंबर 2026 में चरम पर पहुंचता है तो उसका सबसे अधिक प्रभाव 2027 में दिखाई देगा।
ऐसा 1997-98, 2015-16 और 2023-24 के अल नीनो के दौरान देखा गया था, जब अल नीनो विकसित होने वाले वर्ष की तुलना में अगला वर्ष कहीं अधिक गर्म रहा। अनुमान है कि 2027 का औसत वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से लगभग 1.71 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना 92 प्रतिशत है, जबकि 94 प्रतिशत संभावना है कि उस वर्ष वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहेगा। यदि 2026 और 2027 दोनों को साथ लेकर देखा जाए तो 93 प्रतिशत संभावना है कि इन दोनों में से कम से कम एक वर्ष वैश्विक तापमान का नया रिकॉर्ड बनाएगा।
अल नीनो एक प्राकृतिक महासागर-वायुमंडल की प्रक्रिया है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे महासागर में संचित ऊष्मा वातावरण में पहुंचती है, जिसके कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, जंगलों में आग, भारी वर्षा और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ जाती हैं।
भारत में ऐतिहासिक रूप से अल नीनो का संबंध कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से रहा है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) और मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अल नीनो ऐसे समय विकसित हो रहा है जब मानव गतिविधियों से होने वाला जलवायु परिवर्तन पहले ही पृथ्वी को काफी गर्म कर चुका है। 2000 के शुरुआती दशक में वैश्विक तापमान वृद्धि की दर लगभग 0.18 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक थी, जो अब बढ़कर करीब 0.27 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक हो गई है। यही कारण है कि आज आने वाला हर शक्तिशाली अल नीनो पहले की तुलना में कहीं अधिक गर्मी पैदा कर रहा है और वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना बढ़ा रहा है।