पांच हफ्ते तक चले भीषण युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के लिए युद्धविराम पर सहमति जताई है। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले हुआ। इस समझौते ने मध्य पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को फिलहाल टाल दिया है। युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 15 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ने इस युद्धविराम को अपनी रणनीतिक जीत बताया है, हालांकि स्थायी समाधान को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं। फिर भी यह युद्धविराम आगे की कूटनीतिक वार्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना प्रमुख शर्त
इस समझौते का एक अहम हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम की शर्तों में ईरान द्वारा इस मार्ग को खोलने की सहमति शामिल है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पुष्टि की कि युद्धविराम के दौरान ईरानी सेना जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगी। विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और ओमान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने पर भी विचार कर सकते हैं, जिसका उपयोग पुनर्निर्माण कार्यों में किया जा सकता है।
दोनों पक्षों का जीत का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते को “संपूर्ण जीत” बताया और कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात प्रबंधन में मदद करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह युद्धविराम व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने का अवसर प्रदान करता है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यदि वार्ता विफल होती है तो क्या पहले दी गई सैन्य कार्रवाई की धमकियां लागू की जाएंगी।
दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस युद्धविराम को अमेरिका की “स्थायी हार” बताया और दावा किया कि वॉशिंगटन ने तेहरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया।
भविष्य की वार्ता के लिए अलग-अलग प्रस्ताव
यह युद्धविराम दोनों पक्षों के अलग-अलग प्रस्तावों पर आधारित है। ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही का नियमन, ईरान और उसके सहयोगियों पर हमलों को रोकना, क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना, संपत्तियों को अनफ्रीज करना और दीर्घकालिक शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र के बाध्यकारी प्रस्ताव को शामिल किया गया है। इसमें ईरान के परमाणु संवर्धन के अधिकार को सिद्धांत रूप में स्वीकार करने का भी दावा किया गया है।
अमेरिका ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें ईरान से परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने, उच्च संवर्धित यूरेनियम सौंपने, रक्षा क्षमताओं पर सीमा लगाने, क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों का समर्थन बंद करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं। तेहरान ने इनमें से कई मांगों को अत्यधिक और अव्यावहारिक बताया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में वार्ता
अब कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, जिसमें पाकिस्तान अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान दोनों को इस सप्ताह इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। यह दो सप्ताह का युद्धविराम इन बातचीतों के लिए समय प्रदान करेगा और संभावित स्थायी समझौते का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी आमने-सामने वार्ता की तैयारी की पुष्टि की है।
इजरायल शामिल, लेबनान बाहर
इजारयल ने भी युद्धविराम में शामिल होने और ईरान पर हमले रोकने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इसकी पुष्टि की। हालांकि, इजरायल ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जो पाकिस्तान के पहले दिए गए बयान से अलग है।
इसका असर जमीन पर भी दिखा, जहां लेबनान के दक्षिणी हिस्से में एक हवाई हमले में आठ लोगों की मौत हो गई। इजरायली सेना ने टायर शहर के कुछ इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत क्षेत्र खाली करने की चेतावनी भी दी, जिससे युद्धविराम की नाजुक स्थिति उजागर होती है।
हालांकि युद्धविराम से फिलहाल तनाव कम हुआ है, लेकिन कई चुनौतियां अभी बाकी हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है, ऊर्जा कीमतों को बढ़ाया है और भू-राजनीतिक तनाव को तेज किया है। आने वाले सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे, जब वार्ताकार परमाणु नीति, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। यह देखना बाकी है कि यह युद्धविराम स्थायी शांति में बदलता है या केवल अस्थायी विराम साबित होता है।