केंद्र सरकार ने प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ का मसौदा वापस ले लिया है। किसान संगठनों तथा गुड़ एवं खांडसारी उद्योग के विरोध के मद्देनजर सरकार को गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में किए जा रहे बदलावों से कदम पीछे खींचने पड़े।
2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना किसानों से जुड़े इस विवादित आदेश को वापस लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़े विवाद को टाल दिया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 29 मई, 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन में गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 का मसौदा वापस लेने की जानकारी दी है। प्रस्तावित आदेश के विवादित प्रावधानों के कारण गन्ना किसानों तथा गुड़ एवं खांडसारी इकाइयों के हितों को लेकर कई आशंकाएं जताई जा रही थीं।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकारों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों एवं सुझावों के आधार पर मसौदा आदेश पर आगे बढ़ने से पहले उसका पुनः परीक्षण किया जाएगा। इसी के साथ मसौदा गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को औपचारिक रूप से वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मौजूदा गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में संशोधन के उद्देश्य से 20 अप्रैल, 2026 को गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों और सुझावों के लिए जारी किया था। हितधारकों को अपने सुझाव भेजने के लिए एक माह का समय दिया गया था।
कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, निर्धारित अवधि के दौरान राज्य सरकारों तथा अन्य संबंधित पक्षों से बड़ी संख्या में सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने महसूस किया कि प्रस्तावित आदेश में और अधिक विचार-विमर्श तथा समीक्षा की आवश्यकता है। इसके चलते मसौदे को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया गया।
विवादित प्रावधान
गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 के वापस लिए गए मसौदे में नई चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने, क्रशर और खांडसारी इकाइयों के लिए किसानों को एफआरपी के भुगतान की अनिवार्यता सहित नियम-कायदों को और सख्त बनाने वाले कई विवादित प्रावधान शामिल थे। इनसे गन्ना क्षेत्र में चीनी मिलों का एकाधिकार बढ़ने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाली गुड़, खांडसारी इकाइयों और क्रशरों के संचालन में कठिनाइयां आने की आशंकाएं जताई जा रही थीं।
रूरल वॉयस ने सबसे पहले 22 अप्रैल को प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को लेकर खबर प्रकाशित की थी और लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
किसान संगठनों और गुड़ एवं खांडसारी उद्योग के प्रतिनिधि प्रस्तावित आदेश का लगातार विरोध करते हुए अपनी आशंकाएं जता रहे थे। भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी इस मुद्दे पर कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ विचार-विमर्श किया था।