दिल्ली में मानसून की एंट्री, देश का अधिकांश हिस्सा कवर; अगले 2-3 दिन कई राज्यों में बारिश
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लिया है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक मध्य भारत में मानसून के सक्रिय रहने तथा कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को मानसून गुजरात के कुछ और हिस्सों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, पूरे दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के अधिकांश क्षेत्रों तथा राजस्थान के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया है।
इस बार मानसून 5 दिन की देरी से दिल्ली पहुंचा है। गुरुवार सुबह हुई हल्की बारिश के बाद मौसम विभाग ने दिल्ली में मानसून पहुंचने की घोषणा कर दी। मानसून के आगमन के साथ ही दिल्ली और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी से राहत मिली है।
मौसम विभाग का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान परिस्थितियां दक्षिण-पश्चिम मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के शेष क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हैं। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

पिछले 24 घंटे में कहां कितनी बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान मुंबई सहित कोंकण में अत्यंत भारी वर्षा (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा में बहुत भारी वर्षा (12-20 सेमी) हुई। इसके अलावा गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा सौराष्ट्र और कच्छ में भारी वर्षा (7-11 सेमी) दर्ज की गई।
IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे उत्तरी ओडिशा तट पर कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना हुआ है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से अगले 5-6 दिनों के दौरान देश के मध्य भागों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है, जिससे कई राज्यों में व्यापक वर्षा हो सकती है।
बारिश की कमी घटकर 33 फीसदी
देश के कई राज्यों में व्यापक वर्षा होने से 1 जून से 2 जुलाई के दौरान संचयी वर्षा की कमी घटकर सामान्य से 33 फीसदी कम रह गई है। जून के अंत तक यह कमी 40 फीसदी थी। यदि अगले एक-दो सप्ताह तक अच्छी बारिश जारी रहती है, तो जून के दौरान बनी वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार—
- 2 से 8 जुलाई के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, सौराष्ट्र एवं कच्छ, कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ तथा पूर्वोत्तर भारत में व्यापक वर्षा होने की संभावना है।
- हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 2 जुलाई तथा 5 से 8 जुलाई के दौरान; पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 जुलाई तथा 5 से 7 जुलाई के दौरान; पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 से 7 जुलाई तथा पूर्वी राजस्थान में 4 से 8 जुलाई के दौरान काफी से व्यापक वर्षा होने की संभावना है।
- 2 से 5 जुलाई के दौरान दक्षिण गुजरात और कोंकण में; 2 से 4 जुलाई के दौरान सौराष्ट्र और कच्छ में; 3 और 4 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश और ओडिशा में; तथा 3 से 5 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र में कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़, यातायात बाधित होने तथा नदियों-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए प्रशासन को आवश्यक तैयारियां करने के लिए भी कहा गया है।


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