पंजाब कैबिनेट ने भूमि पूलिंग नीति में तीसरी बार किया संशोधन, भू-स्वामियों को दिए अतिरिक्त लाभ

पंजाब कैबिनेट ने भूमि पूलिंग नीति में तीसरे संशोधन को मंजूरी देते हुए भू-स्वामियों के लिए आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट का आकार बढ़ा दिया है। साथ ही, छोटे भू-स्वामियों के लिए ट्रेडेबल लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई), स्टांप ड्यूटी में छूट और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के लिए विकसित प्लॉट जैसी नई सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य नीति के खिलाफ चल रहे विरोध को कम करना है।

पंजाब कैबिनेट ने भूमि पूलिंग नीति में तीसरी बार किया संशोधन, भू-स्वामियों को दिए अतिरिक्त लाभ

किसानों और भू-स्वामियों की चिंताओं को दूर करने के प्रयास में पंजाब कैबिनेट ने राज्य की भूमि पूलिंग नीति (Land Pooling Policy) में तीसरे संशोधन को मंजूरी दी है। संशोधित नीति के तहत शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि देने वाले भू-स्वामियों को पहले की तुलना में अधिक लाभ दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्वीकृत इस संशोधित नीति के तहत भूमि पूलिंग नीति-2021 के अंतर्गत भूमि देने वाले किसानों और भू-स्वामियों को मिलने वाले आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट का आकार बढ़ा दिया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार, योजना के तहत भूमि देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाले प्लॉट का आकार 10 से 40 वर्ग गज बढ़ाया गया है। मिक्स्ड-यूज और जनरल श्रेणी में भूमि देने वाले भू-स्वामियों को अब प्रति एकड़ 200 वर्ग गज के बजाय 210 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट मिलेगा, जबकि 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट की पात्रता पहले की तरह बरकरार रहेगी।

इसी प्रकार, आवासीय श्रेणी में प्रति एकड़ प्लॉट का आकार 1,600 वर्ग गज से बढ़ाकर 1,630 वर्ग गज कर दिया गया है। वहीं व्यावसायिक श्रेणी में यह बढ़ोतरी 800 वर्ग गज से 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। ये संशोधित लाभ एक एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले भू-स्वामियों पर लागू होंगे।

छोटे और खंडित भूमि स्वामित्व वाले किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कैबिनेट ने स्पेशल लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी करने को भी मंजूरी दी है। इसमें भूमि स्वामित्व के आधार पर पात्रता का निर्धारण आनुपातिक रूप से किया जाएगा और इन एलओआई का स्वतंत्र रूप से खरीदा या बेचा जा सकेगा। भू-स्वामी अपनी एलओआई को जोड़कर निर्धारित प्लॉट आकार की पात्रता हासिल कर सकेंगे और बाद में उसे योजना के तहत विकसित प्लॉट के बदले भुना सकेंगे।

एक अन्य महत्वपूर्ण राहत के तहत कैबिनेट ने योजना के अंतर्गत विकसित प्लॉट के पंजीकरण के समय मूल भू-स्वामियों को स्टांप ड्यूटी से पूरी तरह छूट देने का भी निर्णय लिया है।

राज्य सरकार ने आउस्टी (Oustee) नीति में भी संशोधन किया है, ताकि सड़कों और अन्य सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को विकसित प्लॉट उपलब्ध कराए जा सकें। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, एक एकड़ तक भूमि अधिग्रहीत होने पर 200 वर्ग गज, एक से 2.5 एकड़ तक भूमि अधिग्रहीत होने पर 300 वर्ग गज, जबकि 2.5 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहीत होने पर 500 वर्ग गज का विकसित प्लॉट दिया जाएगा।

यह संशोधन आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के सत्ता में आने के बाद भूमि पूलिंग नीति में किया गया तीसरा बदलाव है। पहला संस्करण जून 2025 में अधिसूचित किया गया था, लेकिन किसानों के व्यापक विरोध और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उसे वापस लेना पड़ा। इसके बाद नवंबर 2025 में लाए गए दूसरा संस्करण को भी किसानों और भू-स्वामियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

सरकार का मानना है कि बढ़ाए गए मुआवजा और अतिरिक्त उपायों से भूमि पूलिंग परियोजनाओं में भू-स्वामियों की भागीदारी बढ़ेगी और उनकी प्रमुख चिंताओं का समाधान होगा। हालांकि, कई संगठन अब भी इस नीति के तहत कृषि भूमि और भू-स्वामियों के अधिकारों पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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