वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों के मोर्चे पर भारत के लिए राहत की खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत में 250 डॉलर प्रति टन तक की गिरावट आई है, जिसके चलते इसकी कीमत घटकर 650 डॉलर प्रति टन पर आ गई है। भारत ने पिछले दिनों 25 लाख टन यूरिया आयात के लिए टेंडर जारी किया था, जिसके लिए पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की कीमत पर सौदे हुए। उर्वरक उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए नया टेंडर जारी किया है और इसके लिए कीमत 700 डॉलर प्रति टन से कम रहने की संभावना है। इसके साथ ही डाईअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के दाम भी 900 डॉलर प्रति टन से नीचे आ गए हैं।
वैश्विक कीमतों में गिरावट की वजह ऊंची कीमतों पर बड़े आयातक देशों द्वारा बड़े पैमाने पर खरीदारी नहीं करना रही है। इसके चलते कीमतों में कमी आई है। उर्वरक उद्योग के सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि ऊंची कीमतों पर खरीदारों की कमी इस गिरावट की मुख्य वजह है। भारत में सरकार यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है और चालू खरीफ सीजन में किसी तरह की किल्लत न हो, इसके लिए ऊंची कीमतों पर आयात सौदे किए गए। लेकिन दुनिया के अन्य देशों, जिनमें ब्राजील, यूरोप के देश तथा अफ्रीका और एशिया के अधिकांश देश शामिल हैं, वहां किसानों को उर्वरक बाजार मूल्य पर ही खरीदने पड़ते हैं। ऐसे में मांग पर प्रतिकूल असर पड़ा और कीमतों में गिरावट आ गई।
होर्मुज संकट से बढ़ी थीं कीमतें
वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के जरिए उर्वरकों और गैस की शिपिंग बाधित होने से कीमतों और आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा। इसके चलते कीमतों में दोगुनी तक बढ़ोतरी हो गई थी।
भारत में सालाना करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात किया जाता है। वहीं, गैस आपूर्ति बाधित होने के चलते यूरिया का घरेलू उत्पादन 25 लाख टन प्रति माह से घटकर करीब 17-18 लाख टन प्रति माह रह गया है। इसके कारण खरीफ और आगामी रबी सीजन में यूरिया की उपलब्धता को लेकर संकट की आशंका पैदा हो गई थी, जिसके चलते सरकार ने ऊंची कीमतों पर इसके आयात सौदे किए।
वहीं, गैर-यूरिया उर्वरकों में एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का उत्पादन और आयात दोनों प्रभावित हुए हैं। सरकार ने पिछले दिनों पश्चिमी तट के लिए 920 डॉलर और पूर्वी तट के लिए 930 डॉलर प्रति टन की कीमत पर 13 लाख टन डीएपी के आयात सौदे किए थे। सूत्रों के मुताबिक, डीएपी के दाम भी घटकर 890 डॉलर प्रति टन पर आ गए हैं। सरकार ने डीएपी की कीमत अभी तक 1,350 रुपये प्रति बैग (50 किलोग्राम) पर स्थिर रखी है और न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत इसके लिए अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है।
महंगे हुए कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर
वहीं, उर्वरक कंपनियों ने डीएपी को छोड़कर अधिकांश एनपीके उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। विनियंत्रित उर्वरकों के तहत आने वाले कॉम्प्लेक्स उर्वरकों (एनपीके) के कई वेरिएंट की कीमतों में उर्वरक कंपनियां लागत के अनुसार दाम बढ़ा रही हैं। एनपीके के कुछ वेरिएंट की कीमतें 2250 रुपये से 2450 रुपये प्रति बैग (50 किलो) तक पहुंच गई हैं। एक बड़ी उर्वरक कंपनी ने मार्केटिंग फेडरेशनों को इस कीमत पर एनपीके देने की पेशकश की है।
हालांकि, राजनीतिक रूप से संवेदनशील उर्वरक यूरिया की कीमत सरकार द्वारा नियंत्रित है और उसके दाम स्थिर हैं। वहीं यूरिया की तरह ही महत्वपूर्ण लेकिन विनियंत्रित उर्वरक डाईअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमत को 1350 रुपये प्रति बैग पर सरकार द्वारा परोक्ष रूप से नियंत्रित किया हुआ है, जिसके लिए अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है।
खरीफ सीजन में उपलब्धता का भरोसा
खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने दावा किया है कि देश में उर्वरकों की कुल स्टॉक स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित है तथा सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार जरूरत से अधिक बनी हुई है।
आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कुल उर्वरक आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी है। इसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 200.12 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है, जो कुल आवश्यकता का लगभग 51 प्रतिशत है। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते शिपिंग अब भी काफी सीमित होने के कारण यह चिंता बनी हुई है कि बुवाई के चरम समय और बाद के चरणों में उर्वरकों की उपलब्धता कितनी रहेगी। उर्वरक विभाग ने कहा कि हालिया संकट की स्थिति के बाद आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए लगभग 117.6 लाख टन उर्वरक उपलब्धता बढ़ी है।