अल नीनो का असर: मानसून बारिश का अनुमान घटकर 90 फीसदी, सूखे के खतरे से बढ़ी कृषि की चुनौतियां
मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दौरान बारिश का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 फीसदी कर दिया है जो सूखे जैसे हालात का संकेत है। अल नीनो की संभावना के बीच देश में सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान जताया गया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के लिए अपना दूसरा दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा कि जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य वर्षा की तुलना में केवल 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है। अप्रैल में जारी पहले पूर्वानुमान में यह अनुमान 92 फीसदी था। नए अनुमान के साथ 4 फीसदी की त्रुटि सीमा (मार्जिन ऑफ एरर) भी बताई गई है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन और आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि देश में मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है, जबकि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं।
आईएमडी के अनुसार पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सामान्य रहने की संभावना है, जो दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 94 से 106 फीसदी के बीच हो सकती है। जबकि मध्य भारत एवं दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में एलपीए के मुकाबले 94% से कम और उत्तर-पश्चिमी भारत में एलपीए की तुलना में 92% से कम बारिश होने की सबसे ज्यादा संभावना है।
जून महीने के लिए जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा 92 फीसदी एलपीए से कम रह सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।
अल नीनो की संभावना
वर्तमान में तटस्थ ईएनएसओ (ENSO) परिस्थितियां अल नीनो की ओर बढ़ रही हैं। जून तक अल नीनो बनने की संभावना 82 फीसदी है, जो जुलाई और अगस्त में 90 फीसदी से अधिक हो सकती है।
अल नीनो की स्थिति तब बनती है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का सतही तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर अक्सर दक्षिण एशिया में गर्म और शुष्क मौसम के रूप में दिखाई देता है। भारत में अधिकांश अल नीनो वर्षों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे सूखे की स्थिति पैदा हुई और कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ।
बढ़ सकती हैं हीटवेव की घटनाएं
आईएमडी ने जून में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान लगाया है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से अधिक हीटवेव दिनों की संभावना जताई गई है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी लू की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
हालांकि मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के प्रभाव से अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। कई क्षेत्रों में आंधी, तेज हवाएं और ओलावृष्टि भी हो सकती है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। देश की लगभग 70 फीसदी वार्षिक वर्षा जून से सितंबर के बीच होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से मिलती है। यही बारिश खेती, भूजल पुनर्भरण और जलाशयों को भरने का प्रमुख स्रोत है। सामान्य से कम वर्षा की स्थिति में खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उर्वरकों और ऊर्जा की लागत बढ़ रही है, कमजोर मानसून कृषि क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इससे खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
मानसून की प्रगति
आईएमडी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 16 मई को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में पहुंच गया था, जो सामान्य तिथि से चार दिन पहले है। इसके बाद मानसून दक्षिण अरब सागर और लक्षद्वीप तक आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले एक सप्ताह में इसके केरल और पूर्वोत्तर भारत में पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई महीने में देशभर में वर्षा सामान्य से 4 फीसदी अधिक रही, जबकि 27 मई तक संचयी मौसमी वर्षा सामान्य से 1 फीसदी अधिक दर्ज की गई।

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