देश में चीनी की रिकॉर्ड महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को 10 लाख टन रॉ शुगर (गैर-रिफाइंड चीनी) के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब घरेलू बाजार में पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की तेजी आई है और त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।
डीजीएफटी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह आयात टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत शुल्क-मुक्त होगा। हालांकि, आयात के लिए कई शर्तें तय की गई हैं।
सरकार के इस फैसले से उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है। वैश्विक बाजार में 18 अगस्त को न्यूयॉर्क में रॉ शुगर की कीमत 16.87 सेंट प्रति पाउंड थी, जो करीब 3,700 रुपये प्रति क्विंटल (एफओबी) बैठती है। इसके ऊपर शिपिंग और बीमा की अतिरिक्त लागत भी होगी। वहीं, भारत द्वारा चीनी आयात की अनुमति दिए जाने की खबरों के चलते 20 अगस्त को वैश्विक बाजार में कीमतें 3.5 प्रतिशत बढ़कर 18 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गईं।
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर चीनी को रिफाइंड करने के बाद इसकी लागत 52 से 53 रुपये प्रति किलो के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, भारतीय आयातकों द्वारा सौदे तय होने तक वैश्विक कीमतों में होने वाला बदलाव भी अंतिम लागत को प्रभावित करेगा।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश करीब एक दशक बाद चीनी का आयात करने जा रहा है। पिछले वर्षों में भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त चीनी का उत्पादन करता रहा है, बल्कि दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातकों में भी शामिल रहा है। अब घरेलू बाजार में आपूर्ति की तंगी और कीमतों में तेज उछाल ने सरकार को आयात का रास्ता खोलने के लिए मजबूर किया है।
रिफाइनरी वाली मिलों को लाभ
संभावना है कि रॉ शुगर का आयात मुख्य रूप से बंदरगाहों के पास स्थित रिफाइनरियों वाली कंपनियों द्वारा किया जाएगा। श्रीरेणुका शुगर्स की गुजरात में दो शुगर रिफाइनरियां हैं। वहीं, कुछ अन्य चीनी मिलों के पास भी रॉ शुगर को रिफाइंड करने की सुविधाएं हैं। यदि चीनी मिलें पेराई सीजन जल्दी शुरू करती हैं, तो वे अपने ताजा उत्पादन के साथ-साथ आयातित रॉ शुगर को भी रिफाइंड कर सकती हैं।
आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश
अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों के कारण चीनी की खपत बढ़ जाती है। त्योहारों के दौरान मिठाई, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत में भी तेजी आती है। ऐसे में सरकार का उद्देश्य आयात के जरिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना और कीमतों को नियंत्रित करना है।
सरकार के इस कदम से जाहिर है कि वह नई पेराई शुरू होने से पहले बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना चाहती है। उद्योग सूत्रों का मानना है कि कच्ची चीनी के आयात से चीनी मिलों को सफेद चीनी का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जमाखोरी पर सख्ती
चीनी की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा के मोर्चे पर भी सख्ती कर दी है। सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए केवल 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है। यह आदेश हर महीने 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा। सरकार का मानना है कि सीमित स्टॉक रखने की व्यवस्था से जमाखोरी पर अंकुश लगेगा और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने की आशंका कम होगी।
कीमतें क्यों बढ़ीं?
देश में पिछले दो वर्षों से चीनी का उत्पादन खपत से कम रहा है। चालू पेराई सीजन में करीब 280 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि देश में चीनी की खपत करीब 285 लाख टन है। वहीं, बेहतर उत्पादन के अनुमान के आधार पर सरकार ने 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मई में सरकार ने चीनी निर्यात पर रोक लगा दी, लेकिन इस कदम से पहले करीब आठ लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका था। उत्पादन में कमी के चलते पिछले करीब डेढ़ महीने में चीनी की कीमतों में भारी तेजी दर्ज की गई। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को कर्नाटक में चीनी की एक्स-मिल कीमत 6,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई।
हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। अखिल भारतीय औसत एक्स-मिल चीनी कीमत बढ़कर अब तक के रिकॉर्ड स्तर 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन में शुरुआती स्टॉक कम रहने की आशंका के कारण कीमतों में यह तेज उछाल आया है।
एक्स-मिल कीमतों में तेजी के अनुरूप खुदरा बाजार में भी चीनी महंगी हुई है और आम उपभोक्ताओं को चीनी 62-65 रुपये प्रति किलो के भाव पर खरीदनी पड़ रही है। आपूर्ति को लेकर चिंता, त्योहारी मांग और नई पेराई का सीजन शुरू होने से पहले सीमित उपलब्धता ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और गन्ने की उपलब्धता को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।
उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या नहीं?
10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित चीनी कितनी जल्दी देश में पहुंचती है, उसे रिफाइंड करने में कितना समय लगता है और उसे घरेलू बाजार में किस तरह उपलब्ध कराया जाता है।