चीनी मिलों को मासिक के बजाय पाक्षिक कोटा होगा आवंटित, पहले सप्ताह बेचनी होगी 40 फीसदी चीनी
केंद्र सरकार ने सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पाक्षिक चीनी आवंटन व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत मिलों को आवंटित चीनी का कम से कम 40 फीसदी पहले सप्ताह में बेचना होगा।
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। अब सरकार चीनी मिलों को जारी होने वाले कोटा आवंटन की मौजूदा मासिक व्यवस्था में भी बदलाव करने जा रही है। सितंबर 2026 से मौजूदा मासिक चीनी कोटा प्रणाली की जगह पाक्षिक (Fortnightly) चीनी आवंटन व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत मिलों को आवंटित चीनी की कम से कम 40 प्रतिशत मात्रा पहले सप्ताह में बेचनी होगी, जबकि शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेची जाएगी।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने पाया कि कुछ मामलों में मिलों द्वारा महीने की शुरुआत में चीनी बेचने के बावजूद खरीदारों द्वारा उसका उठान या डिस्पैच महीने के आखिर में किया जा रहा था। इससे बाजार में कृत्रिम रूप से चीनी की कमी पैदा हो रही थी। इस समस्या को दूर करने और बाजार में समय पर चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मौजूदा मासिक कोटा प्रणाली की जगह सितंबर से पाक्षिक चीनी आवंटन व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
नई पाक्षिक व्यवस्था के जरिए सरकार मांग और आपूर्ति की स्थिति पर अधिक करीबी निगरानी रखेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोटा भी जारी कर सकेगी। इस कवायद का मकसद जमाखोरी और बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी को रोकना है।
एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की गिरावट
सरकार ने कहा कि हाल के दिनों में एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि खुदरा बाजार में भी कीमतें कम होना शुरू हो गई हैं। आने वाले समय में खुदरा कीमतों पर भी एक्स-मिल दरों में आई गिरावट का प्रभाव और स्पष्ट रूप से दिखाई देने की उम्मीद है।
औसत खुदरा मूल्य 64 रुपये किलो
चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतों में गिरावट के बावजूद थोक और खुदरा बाजार में कीमतें अब भी उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक, 28 अगस्त को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य लगभग 64 रुपये प्रति किलोग्राम था जबकि औसत थोक मूल्य 5935 रुपये प्रति क्विंटल है।
चीनी स्टॉक का भौतिक सत्यापन
केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए चीनी डीलरों और थोक खरीदारों पर स्टॉक संबंधी पाबंदियां लगाई हैं।
खाद्य मंत्रालय का कहना है कि देशभर में चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया है। इस जांच में कई मामलों में मिलों के पास सरकार को मासिक रिटर्न में घोषित स्टॉक से अधिक चीनी पाई गई। सरकार ने कहा कि सत्यापन से स्पष्ट हुआ है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराकर खरीदारी करने या जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की आवश्यकता नहीं है।
कुछ चीनी मिलों द्वारा आवंटित मासिक कोटे से कम मात्रा में चीनी बेचने, यानी शॉर्ट सेलिंग, के मामले भी सामने आए हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां पर्याप्त भौतिक स्टॉक होने के बावजूद बाजार में अनावश्यक रूप से आपूर्ति को सीमित कर सकती हैं।
7 दिन में चीनी का डिस्पैच अनिवार्य
सरकार ने चीनी मिलों को पहले ही निर्देश दिया है कि बिक्री के सात दिनों के भीतर चीनी का मिल से डिस्पैच सुनिश्चित किया जाए। उम्मीद है कि पाक्षिक कोटा व्यवस्था और सात दिनों के भीतर अनिवार्य डिस्पैच से मिलों से डीलरों और फिर उपभोक्ताओं तक चीनी की आपूर्ति तेज होगी।
जल्द शुरू होगी पेराई
उधर, नए चीनी सीजन के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। इससे अक्टूबर के दौरान 10 लाख मीट्रिक टन (LMT) से अधिक चीनी का उत्पादन होने की संभावना है। सरकार ने मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की अनुमति भी दी है, जिससे नए सीजन की चीनी जल्द से जल्द घरेलू बाजार में पहुंच सकेगी।
नवंबर में चीनी उत्पादन करीब 45 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में चालू मिलों से सितंबर के दौरान करीब 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है।

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