ICAR ने 16 नई देसी पशुधन और कुत्तों की नस्ल को दी मान्यता, पंजीकृत नस्लों की संख्या 262 हुई
ICAR ने नौ प्रजातियों की 16 नई देसी पशुओं और कुत्तों की नस्लों को मान्यता दी है, जिससे देश में पंजीकृत नस्लों की संख्या बढ़कर 262 हो गई है। नई नस्लें 13 राज्यों और जम्मू-कश्मीर से संबंधित हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 16 नई देसी पशुधन और कुत्तों की नस्लों को मान्यता दी है। इसके साथ ही देश में पंजीकृत पशु नस्लों की कुल संख्या बढ़कर 262 हो गई है। इस कदम का उद्देश्य भारत की समृद्ध पशु आनुवंशिक विविधता के दस्तावेजीकरण, पहचान और संरक्षण को मजबूत करना है।
इन नस्लों के पंजीकरण की सिफारिश 7 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित नस्ल पंजीकरण समिति (Breed Registration Committee) की 14वीं बैठक में की गई। बैठक की अध्यक्षता ICAR के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने की।
नई मान्यता प्राप्त नस्लें नौ प्रजातियों से संबंधित हैं और 13 राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में पाई जाती हैं। इनमें चार मवेशी नस्लें, एक भैंस नस्ल, दो बकरी नस्लें, चार भेड़ नस्लें तथा गधा, घोड़ा, सूअर, याक और कुत्ते की एक-एक नस्ल शामिल हैं।
नई पंजीकृत मवेशी नस्लों में कर्नाटक की कोप्पल, मध्य प्रदेश की महाकौशली, केरल की पेरियार और महाराष्ट्र की उमरदा शामिल हैं। गोवा की गोमंचली भैंस नस्ल को भी मान्यता दी गई है। बकरी की नस्लों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश की बत्तीसी तथा राजस्थान की तोतापुरी शामिल हैं। वहीं, नई मान्यता प्राप्त भेड़ नस्लों में असम की असोमी, उत्तराखंड की कोव देबार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की मडग्याल तथा बिहार की सीमांचली शामिल हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश की ब्रज गधा नस्ल, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी घोड़ा नस्ल, नगालैंड की नगाल सूअर नस्ल और सिक्किम की सिक्किमी याक नस्ल को भी पंजीकृत किया गया है। तमिलनाडु की देसी कुत्ते की नस्ल कोम्बाई को भी नई सूची में शामिल किया गया है।
करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBAGR) पशुधन और पोल्ट्री नस्लों के पंजीकरण के लिए देश की नोडल संस्था है। यह नई पंजीकृत नस्लों का आधिकारिक रिकॉर्ड बनाएगा। इन नई नस्लों के जुड़ने के साथ ICAR-NBAGR द्वारा पंजीकृत नस्लों की संख्या 262 हो गई है। इनमें 258 देसी और चार सिंथेटिक नस्लें हैं। नवीनतम पंजीकरण से विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में पशुपालकों द्वारा संरक्षित और विकसित पशु आबादी को औपचारिक पहचान मिली है।
ICAR के अनुसार, नस्लों की पहचान और पंजीकरण से गैर-वर्णित (non-descript) पशु आनुवंशिक संसाधनों की संख्या कम करने और उनके संरक्षण तथा टिकाऊ उपयोग के लिए मजबूत आधार तैयार करने में मदद मिलेगी।
नई मान्यता प्राप्त नस्लें भारत की पशु आनुवंशिक विविधता और स्थानीय कृषि एवं पशुपालन प्रणालियों के बीच मजबूत संबंध को भी दर्शाती हैं। कई देसी नस्लें विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में विकसित हुई हैं और उनमें स्थानीय उत्पादन प्रणालियों के अनुकूल विशेष गुण पाए जाते हैं।
इन नस्लों की पहचान और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में पशुपालकों, प्रजनकों, राज्य पशुपालन विभागों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देसी नस्लों की औपचारिक पहचान से भविष्य के अनुसंधान, प्रजनन कार्यक्रमों और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे भारत की पशुधन आनुवंशिक संपदा का अधिक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।

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