मानसून सीजन के दौरान बारिश में कमी का असर चालू खरीफ सीजन के दौरान देश में प्रमुख फसलों की बुवाई पर पड़ा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 632.69 लाख हेक्टेयर की तुलना में 16.03 प्रतिशत कम है।
खरीफ सीजन की बुवाई सामान्यतः जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है। हालांकि इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव से मानसून की धीमी प्रगति और जून में सामान्य से लगभग 40 फीसदी कम वर्षा के कारण कई राज्यों में बुवाई प्रभावित हुई। हाल के दिनों में वर्षा की स्थिति सुधरी है, लेकिन शुरुआती देरी का असर अभी भी बुवाई के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
10 जुलाई तक धान की बुवाई 114.69 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 125.53 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान का रकबा 10.84 लाख हेक्टेयर (8.64 प्रतिशत) कम है। धान का रकबा अभी भी सामान्य क्षेत्र (412 लाख हेक्टेयर) से काफी कम है।
दलहन फसलों का कुल रकबा घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले वर्ष के 73.85 लाख हेक्टेयर से 23.32 प्रतिशत कम है। प्रमुख दलहनों में अरहर की बुवाई 30.29 प्रतिशत, उड़द 29.72 प्रतिशत, मूंग 10.63 प्रतिशत और मोठ 28.10 प्रतिशत कम रही। केवल कुल्थी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
मोटे अनाज (श्री अन्न) का कुल क्षेत्र 98.69 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 127.30 लाख हेक्टेयर की तुलना में 22.47 प्रतिशत कम है। बाजरा की बुवाई में 26.58 प्रतिशत, ज्वार में 23.64 प्रतिशत और मक्का में 19.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
तिलहन फसलों का रकबा भी 117.83 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 149.18 लाख हेक्टेयर से 21.01 प्रतिशत कम है। मूंगफली की बुवाई में 33.99 प्रतिशत, तिल में 46.03 प्रतिशत, अरंडी में 41.67 प्रतिशत और सोयाबीन में 15.98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि सूरजमुखी और नाइजर सीड के रकबे में वृद्धि रही है।
नकदी फसलों में कपास का क्षेत्र 79.54 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 93.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 15.34 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत गन्ने की बुवाई 57.58 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.52 प्रतिशत अधिक है। जूट एवं मेस्टा का रकबा भी 1.95 प्रतिशत बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया।
जुलाई में मानसून के सक्रिय होने के साथ कई राज्यों में बुवाई की रफ्तार बढ़ी है। यदि आगामी सप्ताहों में वर्षा सामान्य रहती है तो खरीफ बुवाई में तेजी आने की संभावना है।
बारिश की कमी 19 फीसदी तक पहुंची
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 13 जुलाई तक देश में सामान्य से 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक वर्षा की कमी पूर्वोत्तर भारत में है, जहां सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत, मध्य भारत में 8 प्रतिशत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 22 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। 13 जुलाई तक देशभर में 222.4 मिमी वर्षा हुई, जबकि इस अवधि की सामान्य वर्षा 275.7 मिमी है।
हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश से वर्षा घाटा कुछ समय के लिए कम हुआ था, लेकिन मानसून के फिर कमजोर पड़ने से राष्ट्रीय स्तर पर कमी दोबारा बढ़ गई है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई और मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है, विशेषकर उन राज्यों में जहां अभी भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।
आईएमडी ने अगले 3-4 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं अगले 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों तथा पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसून की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।
