पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़े दाम; दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए हैं।

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की। इससे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों के कारण कीमतों में अंतर होता है।

इससे पहले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ईरान युद्ध के कारण बढ़े दबाव के चलते कंपनियां लंबे समय से हो रहे नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।

रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि जारी रह सकती है, जैसा कि वर्ष 2022 में कोविड महामारी के दौरान देखा गया था।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके बावजूद भारत उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा जिसने लंबे समय तक खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि नहीं की।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि हाल में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को टाल रखा था। उनका कहना है कि चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक तेल कीमतों के दबाव के कारण यह फैसला आवश्यक हो गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल के दिनों में लोगों से ईंधन की बचत करने और अनावश्यक यात्राओं से बचने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर महंगे ईंधन का दबाव और बढ़ सकता है।