बासमती मानचित्र पर उभरेगा पीलीभीत, बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र के लिए लीज डीड का हस्तांतरण

पीलीभीत में एपीडा द्वारा बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना से क्षेत्रीय किसानों और निर्यातकों को लाभ मिलेगा। 7 एकड़ में बनने वाला यह केंद्र उन्नत बीज, गुणवत्ता परीक्षण, प्रशिक्षण और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराएगा।

बासमती मानचित्र पर उभरेगा पीलीभीत, बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र के लिए लीज डीड का हस्तांतरण

- पीलीभीत, उत्तर प्रदेश से

बासमती चावल के निर्यात और जैविक कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना का काम शुरू कर दिया है। मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की मौजूदगी में राज्य सरकार द्वारा केंद्र की स्थापना के लिए एपीडा को लीज डीड का हस्तांतरण किया गया।

यह मेरठ के बाद उत्तर प्रदेश में एपीडा का दूसरा बासमती से जुड़ा केंद्र होगा। इस केंद्र से किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक प्रशिक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। पीलीभीत और आसपास के जिलों के अलावा उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों के बासमती किसान भी इससे लाभान्वित होंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इस केंद्र की स्थापना से किसानों को बासमती चावल और जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पीलीभीत में बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना इन्हीं प्रयासों का परिणाम है। केंद्र हेतु भूमि उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने यूपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद दिया। 

उन्होंने कहा कि इस केंद्र का नाम वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर रखा जाएगा। इस केंद्र का लाभ पीलीभीत के साथ पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड को भी मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि अब पीलीभीत बासमती चावल के लिए देश-विदेश में जाना जाएगा। पीलीभीत से बासमती की उन्नत किस्में भी विकसित होंगी। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसान-हित और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को सशक्त करती है। भारत पहले से ही बासमती चावल के निर्यात में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है और इस पहल से निर्यात में और वृद्धि होगी। यह केंद्र न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। सीधे निर्यात से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, गुणवत्ता मानकों, परीक्षण सुविधाओं, पैकेजिंग और निर्यात प्रक्रियाओं से संबंधित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, प्रदर्शन फार्म के जरिए बासमती और जैविक कृषि उत्पादन के उन्नत तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। एपीडा के तहत यह देश का पहला जैविक प्रदर्शन एवं सीड फार्म होगा। यह केंद्र भारत सरकार की कृषि निर्यात प्रोत्साहन के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है।

एपीडा के अधिकारियों के अनुसार, यह केंद्र किसानों और निर्यातकों के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और निर्यात से जुड़ी बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। कार्यक्रम में एपीडा के सेक्रेटरी डॉ सुधांशु और दूसरे अधिकारी भी मौजूद रहे । स्थानीय जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, निर्यातक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

7 एकड़ भूमि पर केंद्र का निर्माण
पीलीभीत की तहसील अमरिया के ग्राम टांडा बिजेसी में बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म के लिए 7 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है। यह केंद्र पीलीभीत और आसपास के बासमती उत्पादक क्षेत्रों के किसानों, निर्यातकों, बीज उत्पादकों, प्रोसेसर्स तथा एफपीओ (FPOs) के लिए उपयोगी साबित होगा।

उपज गुणवत्ता पर जोर
केंद्र की स्थापना से बासमती उत्पादन, गुणवत्ता सुधार और निर्यात को वैज्ञानिक व संगठित दिशा मिलेगी। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को उन्नत बासमती किस्मों का प्रदर्शन, आधुनिक खेती पद्धतियों, कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक खेती, बीज उत्पादन तथा गुणवत्ता मानकों से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक
बासमती निर्यातकों के लिए यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय मानकों, ट्रेसेबिलिटी, अवशेष प्रबंधन (Residue Management) तथा निर्यात आवश्यकताओं की जानकारी का प्रमुख स्रोत बनेगा। 

केंद्र पर उपलब्ध सुविधाएं
केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी, जिनमें:

  • प्रयोगशाला (बासमती डीएनए परीक्षण, कीटनाशक अवशेष एवं भारी धातु परीक्षण)

  • उन्नत बीज उत्पादन यूनिट

  • अनुसंधान एवं प्रदर्शन केंद्र

  • किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 

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