नया बीज कानून किसानों के लिए ऐतिहासिक सुधार, नकली बीज बेचने पर होगी सख्त कार्रवाई: शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नए बीज कानून का उद्देश्य हर किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना, अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन और गलत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परंपरागत बीजों के उपयोग और आदान-प्रदान पर कोई रोक नहीं होगी।
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मीडिया से बातचीत में नए सीड एक्ट की विशेषताओं और किसानों पर इसके प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब देश में बीज की ट्रेसिबिलिटी की व्यवस्था स्थापित की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस डीलर ने उपलब्ध कराया और किसने उसे बेचा। इससे घटिया या नकली बीज बाजार में आएंगे ही नहीं और यदि आएंगे तो उन्हें तुरंत पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसने खराब बीज दिया है, उसे दंडित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 का सीड एक्ट पुराने समय की जरूरतों के अनुरूप था, जब न आधुनिक तकनीक थी और न ही डेटा आधारित व्यवस्था। अब सरकार एक आधुनिक कानून ला रही है, जो ट्रेसिबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित है, ताकि भविष्य में कोई भी किसान ठगा न जाए।
बीज कंपनियों का पंजीकरण अनिवार्य
चौहान ने कहा कि अब प्रत्येक बीज कंपनी का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है। कोई भी अनधिकृत विक्रेता बीज नहीं बेच सकेगा। इससे बाजार में फर्जी कंपनियों पर रोक लगेगी और किसानों को विश्वसनीय स्रोतों से बीज उपलब्ध होंगे।
परंपरागत बीजों पर कोई पाबंदी नहीं
केंद्रीय मंत्री ने इस भ्रम को भी दूर किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर रोक लगाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया, “किसान अपने बीज बो सकते हैं और दूसरे किसानों को भी बीज दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर परंपरागत बीजों के आदान-प्रदान की जो परंपरा है, वह पहले की तरह जारी रहेगी।”
नकली बीज बेचने वालों पर सख्त सजा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीजों की गुणवत्ता को लेकर अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभी तक नकली बीज बेचने पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना था, जबकि नए कानून में 30 लाख रुपये तक जुर्माने और जानबूझकर अपराध करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियां गलत नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ICAR और देसी कंपनियां होंगी मजबूत
कृषि मंत्री ने कहा कि नए सीड एक्ट में तीन स्तरों पर प्रावधान किए गए हैं—सार्वजनिक क्षेत्र (ICAR, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र), उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार करने वाली देसी कंपनियां, और विदेशी बीजों के लिए एक सुदृढ़ मूल्यांकन व्यवस्था।
उन्होंने कहा, “विदेश से आने वाले बीजों को पूरी जांच और मूल्यांकन के बाद ही स्वीकृति दी जाएगी। हमारे सार्वजनिक और देसी निजी क्षेत्र को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसानों तक बेहतर गुणवत्ता के बीज पहुंच सकें।” देश के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों को बीज की गुणवत्ता, बीज चयन और शिकायत निवारण से जुड़ी जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राज्य सरकारों के अधिकार रहेंगे यथावत
यह पूछे जाने पर कि क्या नया बीज कानून राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करेगा, केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया, “कृषि राज्य का विषय है। राज्य सरकारों के अधिकार पहले की तरह बने रहेंगे। केंद्र केवल समन्वय की भूमिका निभाएगा और राज्यों के सहयोग से इस कानून को लागू किया जाएगा।”
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज मिले। अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन और गलत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई ही इस कानून का सार है। उन्होंने कहा कि सीड एक्ट 2026 के माध्यम से सरकार किसानों को सुरक्षित, भरोसेमंद और उत्पादक बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रही है।

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