गन्ना उपज में गिरावट से चीनी उद्योग की मुश्किलें बढ़ीं, उन्नत किस्म को जल्द मंजूरी दिलवाने में जुटा इस्मा
गन्ने की उपज में गिरावट और Co-0238 किस्म के रोगग्रस्त होने से किसान और चीनी उद्योग संकट में है। इस्मा ने आईसीएआर से नई किस्म Co-20016 को 2026-27 बुवाई सीजन से पहले मंजूरी देने के लिए VIC की विशेष बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि नई किस्म जल्द से जल्द किसानों तक पहुंच सके।
देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर रोग और मौसम की मार के चलते चीनी मिलों के सामने गन्ना उपलब्धता की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है, जबकि किसानों को उपज में गिरावट के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी उद्योग के सामने उत्पन्न इस संकट से उबरने के लिए गन्ने की उन्नत किस्मों का किसानों तक पहुंचना बेहद जरूरी हो गया है। इसके लिए निजी चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने भी प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में सरकारी औपचारिकताओं की बाधाएं सामने आ रही हैं।
गन्ने की बेहद सफल रही किस्म Co-0238 के रोगग्रस्त होने के बाद किसान इसका विकल्प तलाश रहे हैं। इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के शोध संस्थानों के प्रयास जारी हैं। आईसीएआर के कोयंबटूर स्थित शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट ने गन्ने की किस्म Co-20016 विकसित की है, जिसने कई स्थानों पर परीक्षणों में अच्छे परिणाम दिए हैं। इस किस्म को Co-0238 का संभावित विकल्प और मौजूदा किस्मों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। इसलिए इस्मा भी इसे जल्द मंजूरी दिलाने के लिए प्रयासरत है।
सूत्रों के के मुताबिक इस सिलसिले में इस्मा ने आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम एल जाट को पत्र लिखकर Co-20016 को शीघ्र मंजूरी दिलाने के लिए किस्म पहचान समिति (VIC) की विशेष बैठक जल्द बुलाने की मांग की है, ताकि 2026-27 के बुवाई सीजन की शुरुआत से पहले व्यावसायिक खेती के लिए इसकी अधिसूचना जारी की जा सके।
ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दो मुख्य फसलों (plant crops) और एक पेड़ी फसल (ratoon crop) के संपूर्ण परिणाम अप्रैल 2026 तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। लेकिन आईसीएआर की मौजूदा व्यवस्था के तहत गन्ने के लिए किस्म पहचान समिति (VIC) की बैठक सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर में आयोजित की जाती है। ऐसे में Co-20016 को मंजूरी के लिए नवंबर 2026 तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे अधिसूचना और व्यावसायिक उपलब्धता में लगभग एक वर्ष की देरी होगी।
इस्मा ने आईसीएआर से अनुरोध किया है कि गन्ने के मौजूदा संकट को देखते हुए जून या जुलाई 2026 में विशेष रूप से Co-20016 पर विचार करने के लिए VIC की बैठक बुलाई जाए, ताकि 2026-27 के बुवाई सीजन से पहले इसकी अधिसूचना जारी की जा सके। इससे किस्म जारी होने और किसानों तक पहुंचने में लगभग एक वर्ष की बचत होगी तथा उत्पादकता सुधार में मदद मिलेगी।
उद्योग सूत्रों के मुताबिक गन्ने की बेहतर किस्मों की पहचान के संबंध में पिछले महीने 9 फरवरी को संयुक्त सचिव (चीनी) के साथ इस्मा की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
गौरतलब है कि गन्ना बेल्ट, खासकर उत्तर प्रदेश में, किस्मों के पुराने पड़ने, नई किस्मों के प्रतिस्थापन में देरी, बीज गुणन प्रणाली की खामियों और रोग के बढ़ते प्रकोप के कारण गन्ने की पैदावार और उत्पादन प्रभावित हुआ है। पर्याप्त गन्ना न मिल पाने और कोल्हू व खांडसारी इकाइयों से प्रतिस्पर्धा के चलते फरवरी में ही उत्तर प्रदेश की 120 में से 18 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। राज्य में 28 फरवरी तक गन्ने की कुल पेराई 737 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह 766 लाख टन थी। गन्ने की कमी के कारण प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलें मार्च के अंत तक बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।

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