भारत से खाड़ी और पश्चिमी देशों को निर्यात रुका, शिपिंग कंपनियों ने लगाया 4000 डॉलर तक इमर्जेंसी चार्ज
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद ईरान द्वारा जवाबी हमलों के चलते खाड़ी और पश्चिमी देशों के लिए भारत का निर्यात कारोबार ठप हो गया है। हमलों से बढ़े खतरे के चलते शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों को जाने वाले और वहां से आने वाले माल पर 2000 डॉलर से लेकर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लगा दिये हैं।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद ईरान द्वारा जवाबी हमलों के चलते खाड़ी और पश्चिमी देशों के लिए भारत का निर्यात कारोबार ठप हो गया है। हमलों से बढ़े खतरे के चलते शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों को जाने वाले और वहां से आने वाले माल पर 2000 डॉलर से लेकर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लगा दिये हैं। यह चार्जेज आज यानी 2 मार्च से ही लागू हो गये हैं। सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि इस स्थिति की समीक्षा के लिए आज दोपहर बाद वाणिज्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। यह बैठक डायरेक्टर जनरल फारेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने बुलाई है।
रूरल वॉयस के पास उपलब्ध सूचना के मुताबिक शिपिंग कंपनियों ने कहा कि शिपिंग के लिए होने वाली बुकिंग पर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लागू होंगे। इराक, बहरीन, कुवैत, यमन, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), किंगडम ऑफ सऊदी अरब, जार्डन, मिस्र (पोर्ट ऑफ आइन सोखाना), दजिबुती, सूडान और इरिटिया के पोर्ट के लिए भारत से होने वाले निर्यात या इन देशों से भारत के आयात की लोडिंग पर इमर्जेंसी चार्जेज लागू होंगे।
इमर्जेंसी चार्जेज के तहत 20 फीट के ड्राई कंटेनर पर 2000 डॉलर, 40 फीट के कंटेनर पर 3000 डॉलर और रीफर या स्पेशल इक्विपमेंट पर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर का चार्ज फ्रेट रेट में जोड़ा जाएगा। निर्यात उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस तरह के चार्जेज के तहत निर्यात होना संभव ही नहीं है क्योंकि खर्चे बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगे। उक्त सूत्र के मुताबिक फिलहाल इन देशों को समुद्री और हवाई दोनों रास्ते से कृषि और संबद्ध क्षेत्र के उत्पादों का निर्यात रुक गया है।
दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत ने ईरान को कुल करीब 124 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। इसमें कृषि उत्पाद का हिस्सा ही अधिक है। पिछले वर्ष ईरान को 74.7 करोड़ डॉलर का चावल निर्यात हुआ। इसके बाद 6.1 करोड़ डॉलर के केले और 5.1 करोड़ डॉलर की चायपत्ती का निर्यात किया गया।
उद्योग सूत्रों का कहना है कि शिपिंग कंपनियों द्वारा बढ़ाये गये चार्ज के अलावा दूसरा संकट पोर्ट पर लोड हो रहे माल का है। इन देशों के लिए लोडिंग रुक गई है। ऐसे में पोर्ट द्वारा प्रतिदिन 100 डॉलर का ग्राउंड चार्ज लागू किया जाएगा।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि खाड़ी देशों के साथ ही इस रूट से यूरोप और अन्य देशों को होने वाला निर्यात भी रुक गया है। सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है। हालांकि अभी इस स्तर पर युद्ध के चलते निर्यात व्यापार को होने वाले नुकसान का आकलन नहीं किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय में होने वाली बैठक में सरकारी अधिकारियों के अलावा निर्यात से जुड़ी एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों को भी बुलाया गया है। इसमें कंपनियों को उनके द्वारा लगाये गये चार्जेज से पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए कहा जा सकता है।

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