केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं निर्यात को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात को और बढ़ावा देते हुए अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। यह साल 2026 में गेहूं निर्यात की तीसरी खेप है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने और घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं निर्यात को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने कृषि निर्यात से जुड़ा अहम फैसला लेते हुए अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी और किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। इस साल यह तीसरा मौका है जब सरकार ने गेहूं के निर्यात का रास्ता खोला है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी है। यह निर्णय गेहूं के उत्पादन, स्टॉक उपलब्धता और बाजार कीमतों के रुझानों की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है। 
रबी सीजन 2025-26 में गेहूं की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 334 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल के 328 लाख हेक्टेयर से अधिक है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 1202 लाख टन रहने का अनुमान है।
तीसरी बार निर्यात खुला
जनवरी 2026: 5 लाख टन गेहूं उत्पादों (आटा आदि) के निर्यात को मंजूरी।
फरवरी 2026: 25 लाख टन गेहूं और अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों की अनुमति।
अप्रैल 2026: अब अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी।
इस तरह कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। हालांकि, गेहूं का निर्यात अभी भी प्रतिबंधित श्रेणी में है। गेहूं निर्यात के संबंध में DGFT विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।
गेहूं का पर्याप्त स्टॉक
1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के केंद्रीय पूल में गेहूं का कुल स्टॉक लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। निजी क्षेत्र के पास भी पिछले साल की तुलना में करीब 32 लाख टन अधिक स्टॉक है। सरकार का कहना है कि निर्यात अनुमति से घरेलू खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास
यह फैसला किसानों को गेहूं का बेहतर दाम दिलाने, कीमतों को स्थिर रखने और आवक बढ़ने के दौरान दबाव में बिक्री रोकने में मददगार साबित हो सकता है। मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ने के साथ ही रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमानों को देखते हुए कई इलाकों में व्यापारी एमएसपी से कम भाव पर गेहूं खरीद रहे थे। 

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