प्याज का खरीद मूल्य 24% बढ़कर 15.80 रुपये प्रति किलो हुआ; दालों का बफर स्टॉक रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंचा

महाराष्ट्र में किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज का खरीद मूल्य 24.4 प्रतिशत बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। वहीं दालों का बफर स्टॉक बढ़कर रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंच गया।

प्याज का खरीद मूल्य 24% बढ़कर 15.80 रुपये प्रति किलो हुआ; दालों का बफर स्टॉक रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंचा

महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज का खरीद मूल्य 24.4 प्रतिशत बढ़ाकर 12.70 रुपये प्रति किलोग्राम से 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। सोमवार को अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने बताया कि संशोधित खरीद मूल्य मौजूदा बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय किया गया है, ताकि प्याज उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।

चालू सीजन के लिए प्याज की खरीद 15 मई से शुरू हो चुकी है, जबकि संशोधित खरीद मूल्य की अधिसूचना 22 मई को जारी की गई थी। बाजार में अत्यधिक मूल्य उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर वर्ष मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत बफर स्टॉक का निर्माण करती है। वर्तमान सीजन में सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो 2025-26 में खरीदे गए 3 लाख टन की तुलना में कम है।

दालों का बफर स्टॉक ऐतिहासिक स्तर पर

दालों की खरीद और भंडारण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मई 2026 में दालों का बफर स्टॉक बढ़कर रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंच गया, जो मई 2025 के 18 लाख टन से दोगुने से भी अधिक है। मई 2024 में स्टॉक 21 लाख टन का था। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे मंडी कीमतें आने पर लागू की जाने वाली मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत अब तक 5.34 लाख टन तूर (अरहर) और 20.35 लाख टन चना की खरीद की जा चुकी है।

अधिकारियों के अनुसार, घरेलू उत्पादन में वृद्धि से आयात पर भारत की निर्भरता कम हुई है। वर्ष 2025-26 में कुल दाल आयात लगभग 30 प्रतिशत घटकर 60 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 73 लाख टन था। चना आयात में और भी तेज गिरावट दर्ज की गई। 2024-25 में 15.06 लाख टन के मुकाबले यह 51 प्रतिशत घट गया।

दाल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

सरकार के अनुसार, वर्ष 2025-26 में कुल दाल उत्पादन रिकॉर्ड 274.09 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 257 लाख टन की तुलना में 6.7 प्रतिशत तथा 2023-24 के 242 लाख टन की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। 2024-25 और 2025-26 के बीच सभी प्रमुख दालों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।

चना उत्पादन 12.6 प्रतिशत बढ़कर 111 लाख टन से 125.14 लाख टन हो गया। मूंग उत्पादन लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 42.44 लाख टन से 44.92 लाख टन पहुंच गया। वहीं मसूर उत्पादन करीब 7 प्रतिशत बढ़कर 16.54 लाख टन से 17.62 लाख टन हो गया। 

ईरान युद्ध का दाल आपूर्ति पर सीमित असर

यह अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई थी, जिसमें भारत की खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर संभावित प्रभावों का आकलन किया गया। अनुपम मिश्रा ने कहा कि भारत को दालों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश म्यांमार, तंजानिया, मलावी, मोजाम्बिक, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील, पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सीधे प्रभावित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस कारण दालों की आपूर्ति में व्यवधान का जोखिम सीमित है और आने वाले महीनों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर किसी बड़ी चिंता की संभावना नहीं है।

Subscribe here to get interesting stuff and updates!