सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 11.39% हुई, खाद्य महंगाई भी 8.66% पर पहुंची

भारत में थोक महंगाई सितंबर 2026 में बढ़कर 11.39% हो गई, जो अगस्त में 9.92% थी। इस दौरान खाद्य महंगाई भी 7.05% से बढ़कर 8.66% पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं और कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से दबाव बढ़ा।

भारत में थोक महंगाई दर (WPI) सितंबर में बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई भी अगस्त के 7.05 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 8.66 प्रतिशत हो गई। यह कृषि जिंसों और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ते दबाव को दर्शाता है। प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक वस्तु समूह में शामिल खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर सितंबर में 8.14 प्रतिशत दर्ज हुई। यह अगस्त 2026 में 5.67 प्रतिशत थी। मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं के समूह में शामिल खाद्य पदार्थों की महंगाई भी 9.44 प्रतिशत रही, जो अगस्त में 9.65 प्रतिशत थी। कुल मिलाकर फूड इंडेक्स अगस्त के 7.05 प्रतिशत के मुकाबले 8.66 प्रतिशत रहा।
वित्त वर्ष के पहले छह महीने, अर्थात अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान प्राथमिक वस्तु समूह में शामिल खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 5.18 प्रतिशत रही है। यह पिछले साल -4.28 प्रतिशत और 2024-25 में 9.05 प्रतिशत थी। मैन्युफैक्चर्ड वस्तु समूह में शामिल खाद्य पदार्थों की थोक कीमतों में इस वर्ष पहली छमाही में 7.73 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि 2025-26 में यह 4.84 प्रतिशत और 20224-25 में 2.64 प्रतिशत था।
खाद्य कीमतों में वृद्धि थोक महंगाई का एक प्रमुख घटक बनी हुई है। WPI बास्केट में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 15.98 प्रतिशत है, जबकि संयुक्त खाद्य सूचकांक का भार लगभग 25 प्रतिशत है। सितंबर के आंकड़े कृषि और खाद्य आपूर्ति शृंखला में कीमतों के दबाव में दोबारा तेजी का संकेत देते हैं।

कृषि उत्पादों के उत्पादक मूल्य भी बढ़े

उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों पर नजर रखने वाले उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के अनुसार, कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन का सूचकांक अगस्त के 116.5 से बढ़कर सितंबर में 118.7 हो गया। फसल एवं पशु उत्पादन, शिकार और संबंधित सेवाओं का सूचकांक भी 117.1 से बढ़कर 119.9 पर पहुंच गया।
हालांकि, इस समूह के भीतर मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर का सूचकांक 103.1 से घटकर 100.0 रह गया। यह कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में कीमतों के अलग-अलग रुझानों को दर्शाता है। मैन्युफैक्चर्ड खाद्य उत्पादों का उत्पादन मूल्य सूचकांक भी मामूली बढ़कर 117.6 से 117.7 हो गया।
समग्र अर्थव्यवस्था के स्तर पर थोक महंगाई अगस्त के 9.92 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 11.39 प्रतिशत हो गई। इस दौरान ईंधन एवं बिजली की महंगाई बढ़कर 25.85 प्रतिशत रही, जबकि विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 9.76 प्रतिशत तक पहुंच गई।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि कीमतों का दबाव केवल प्राथमिक कृषि जिंसों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और विनिर्माण के अन्य क्षेत्रों में भी बना हुआ है। इसलिए खेत से खाद्य उत्पादों तक की पूरी आपूर्ति शृंखला में कीमतों के रुझान पर नजर रखने के लिए थोक मूल्य सूचकांक एक महत्वपूर्ण संकेतक है।