जंतर मंतर से संसद तक युवाओं का प्रदर्शन: पुलिस लाठीचार्ज-आंसू गैस से तनाव, संसद में भी गूंजा मामला

पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर हजारों युवा जंतर मंतर से संसद की ओर कूच के लिए जुटे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। विपक्ष ने संसद में इस कार्रवाई पर सवाल उठाया।

साल 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर बड़े जनआंदोलन की गवाह बनी। इस बार पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, रोजगार और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों का प्रदर्शन व्यापक रूप ले चुका है।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन "संसद मार्च" के आह्वान पर हजारों की संख्या में युवा नई दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। जंतर मंतर से शुरू हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और युवा शामिल हुए। पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए, लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कई जगह अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया और कुछ समूह सुरक्षा घेरा पार कर संसद भवन के निकट तक पहुंच गए। इसके बाद संसद परिसर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई तथा मुख्य प्रवेश द्वारों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित रहा।

पुलिस की ओर से आंसू गैस और लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिशों के बावजूद, हजारों युवाओं ने जंतर मंतर से संसद तक कूच करने का प्रयास जारी रखा।

बड़ी संख्या में पहुंचे युवा और छात्र

सुबह से ही जंतर मंतर पर हजारों युवा जुटने लगे। प्रदर्शन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और युवा शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रही। कई स्थानों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबरें हैं।

जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि करीब 50 साल बाद देश में युवाओं के नेतृत्व में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि शिक्षा और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लौट आया है। यादव ने सरकार से दमन की बजाय संवाद का रास्ता अपनाने और "अयोग्य शिक्षा मंत्री" को हटाकर युवाओं की बात सुनने की अपील की।

इस दौरान अभिनेत्री शबाना आज़मी, राज्यसभा सांसद मनोज झा और अभिनेता प्रकाश राज भी जंतर मंतर पहुंचे। उन्होंने AISA की नेहा समेत अन्य छात्रों को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।

संसद में उठा मुद्दा

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन विपक्षी दलों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग की आलोचना करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने आए युवाओं पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उनकी मांगों को सुनने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई की गई।

सरकार ने बातचीत की पहल की

दिनभर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत की पहल की। CJP के अनुसार, सरकार की ओर से सुबह ही संवाद का प्रस्ताव भेजा गया, जिसके बाद संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से मिलने पहुंचे। आंदोलन शुरू होने के बाद सरकार और CJP के बीच यह पहली औपचारिक वार्ता मानी जा रही है।

बैठक के दौरान CJP प्रतिनिधियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई और परीक्षा संबंधी दबाव के कारण आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग शामिल है।

बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि जे. पी. नड्डा ने इन मांगों पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के लिए समय मांगा और आंदोलन समाप्त करने की अपील की। हालांकि, बैठक के बाद किसी ठोस आश्वासन या निर्णय की घोषणा नहीं की गई।