देश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की जांच में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान जांचे गए 39,351 दूध एवं दुग्ध उत्पादों के नमूनों में से 14,668 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप (Non-Conforming) नहीं पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का लगभग 37.3 प्रतिशत है।
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। मंत्री ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से प्राप्त जानकारी के आधार पर राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों द्वारा किए गए देशव्यापी सर्वेक्षण के प्रारंभिक (प्रोविजनल) निष्कर्ष भी सदन में साझा किए।
गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबार संचालकों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई भी की गई। गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन मिलने पर 10,714 सिविल मामले और 1,054 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें 9,783 मामलों में सिविल दंड या दोषसिद्धि तथा 204 मामलों में आपराधिक दोषसिद्धि दर्ज की गई। सिविल मामलों में लगभग 34.37 करोड़ रुपये और आपराधिक मामलों में 34.51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े प्रारंभिक (Provisional) हैं और आगे प्रयोगशाला परीक्षण, अपील तथा न्यायालयी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें संशोधन संभव है।
पिछले वर्ष की तुलना में बढ़े गैर-अनुरूप नमूने
इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में एफएसएसएआई ने 33,405 दूध एवं दुग्ध उत्पादों के नमूनों की जांच की थी, जिनमें 12,780 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए थे और 12,057 मामले दर्ज किए गए थे। इसके मुकाबले FY26 में जांचे गए नमूनों की संख्या के साथ-साथ गैर-अनुरूप नमूनों की संख्या भी बढ़ी है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक
सरकार ने लोकसभा को बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है। देश का दूध उत्पादन 2014-15 में 14.6 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 24.8 करोड़ टन हो गया है, जो लगभग 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
मंत्रालय के अनुसार, देश में उत्पादित कुल दूध का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा दुग्ध उत्पादक किसान स्वयं उपभोग करते हैं, जबकि 63 प्रतिशत दूध बाजार में आता है। बाजार में आने वाले इस दूध में से 32 प्रतिशत का विपणन संगठित क्षेत्र (डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरियां) के माध्यम से होता है, जबकि 68 प्रतिशत दूध अभी भी असंगठित क्षेत्र के जरिए बेचा जाता है।
सरकार ने कहा कि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को संगठित डेयरी नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को बेहतर बाजार, गुणवत्तापूर्ण परीक्षण व्यवस्था और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने का लाभ मिल सके। सरकार ने डेयरी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।