भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे कम बारिश के साथ समाप्त हुआ है। जून से सितंबर के चार महीनों के दौरान देश में सामान्य से करीब 13% कम बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 2015 में मानसूनी बारिश सामान्य से 12.7% कम रही थी। उस वर्ष भी मजबूत अल-नीनो की स्थिति बनी थी, जैसा कि इस साल देखने को मिल रहा है।
इस साल अल-नीनो ने मानसूनी बारिश को प्रभावित किया। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून सीजन के दौरान 1 जून से 30 सितंबर तक देश में कुल 759.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिमी है। क्षेत्रीय स्तर पर बारिश की स्थिति में काफी अंतर रहा। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 26% कम, दक्षिण प्रायद्वीप में 24% कम और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% कम बारिश हुई। मध्य भारत में बारिश की कमी 3% रही।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत इस मानसून सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा। यहां सामान्य 1,367.3 मिमी के मुकाबले 1,017.1 मिमी बारिश हुई, जो 26% कम है। दक्षिण प्रायद्वीप में 716.2 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 542 मिमी बारिश हुई, यानी 24% की कमी रही।
उत्तर-पश्चिम भारत में 553 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 587.6 मिमी है। वहीं, मध्य भारत में 978 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 952.8 मिमी बारिश दर्ज हुई और मौसमी कमी 3% रही।
देश के 36 मौसम विज्ञान उपखंडों के 1 जून से 29 सितंबर की अवधि के आंकड़ों के अनुसार, 18 उपखंडों में सामान्य बारिश रही, जो देश के 53% क्षेत्र के बराबर है। 17 उपखंडों में बारिश कम रही है, जिनका क्षेत्रफल 42% है। एक उपखंड में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई।
अल-नीनो ने बढ़ाई चिंता
इस साल मानसून के कमजोर रहने के पीछे अल-नीनो को प्रमुख कारण माना जा रहा है। मानसून के दौरान अल-नीनो विकसित होने का अनुमान जताया गया था। जुलाई में अल-नीनो कमजोर से मध्यम स्तर तक पहुंच गया था और मौसम विभाग ने इसके आगे और मजबूत होने की संभावना जताई थी।

पांच राज्यों में सूखे की स्थिति
कम मानसूनी बारिश का असर कई राज्यों में कृषि और जल उपलब्धता पर दिखाई दे रहा है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति है। इन राज्यों में सूखे के अलावा भारी बारिश और बाढ़ से भी फसलों को नुकसान हुआ है। लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित होने की प्रारंभिक जानकारी दी गई है।
कर्नाटक में सूखे की स्थिति के आकलन के लिए केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को जाएगी, जबकि महाराष्ट्र के लिए भी केंद्रीय आकलन टीम भेजे जाने की बात कृषि मंत्री ने कही है।
खरीफ में धान का रकबा घटा
कम और असमान बारिश के बावजूद कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र में लगभग 1% की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, धान के रकबे में लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी कमी दर्ज हुई। दूसरी ओर, उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और अरहर जैसी फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है।
खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य घटाया
मानसून की कमी और अल-नीनो की आशंकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 मिलियन टन रखा है। यह 2025-26 में हासिल 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है। कुल लक्ष्य में 2026 के खरीफ सीजन के लिए 196.21 मिलियन टन और रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है।