फसलों पर मौसम की मार के बाद 72 घंटे अहम: जानिए कैसे दें फसल नुकसान की सूचना

बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से रबी फसलों को भारी नुकसान के बीच किसानों के लिए अगले 72 घंटे बेहद अहम हैं। समय पर सूचना देने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम मिल सकता है, जबकि बिना बीमा वाले किसानों को SDRF के जरिए राहत दी जाती है। जानिए मुआवजा पाने की पूरी प्रक्रिया और जरूरी शर्तें।

पिछले एक सप्ताह के दौरान हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से रबी की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों की मेहनत पर आपदा की मार के बाद राहत और मुआवजे का इंतजार शुरू हो गया है। जिन किसानों की फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा हुआ है, उन्हें फसल नुकसान पर बीमा क्लेम मिलता है, बशर्ते समय पर फसल नुकसान की सूचना बीमा कंपनी, कृषि विभाग या संबंधित बैंक शाखा को दी जाए।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि हमने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के सभी नियमों में संशोधन किया और यह तय किया कि अगर एक भी किसान का नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी को उस नुकसान का मुआवजा देना होगा। राज्यों से तुरंत संपर्क कर नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। SDRF के तहत राज्य सरकारें राहत दे रही हैं, वहीं फसल बीमा योजना के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर किसानों को राहत उपलब्ध कराई जाए।

प्राकृतिक आपदाओं जैसे बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या सूखे से होने वाले फसल नुकसान के लिए मुख्य रूप से दो तरीकों से सहायता प्रदान की जाती है:

1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
यह योजना उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया है। फसल कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक खेत में रखी फसल यदि असामयिक वर्षा या प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब होती है, तो उसे बीमा कवरेज में शामिल किया जाता है। इससे प्रभावित किसानों को व्यक्तिगत आधार पर भी नुकसान की भरपाई का प्रावधान है।

इसके लिए किसानों को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है। यह सूचना कृषि रक्षक पोर्टल https://pmfby.gov.in/krph, ‘क्रॉप इंश्योरेंस ऐप’ (Crop Insurance App) या हेल्पलाइन नंबर 14447 के माध्यम से दी जा सकती है। किसान व्हाट्सऐप चैटबॉट नंबर 7065514447 पर भी संदेश भेज सकते हैं।

इसके अलावा, किसान संबंधित बीमा कंपनी, नजदीकी कृषि कार्यालय या बैंक शाखा के माध्यम से जानकारी दे सकते हैं।

2. राज्य आपदा राहत कोष (SDRF)
जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, उन्हें राज्य सरकारें अपने नियमों के अनुसार राहत प्रदान करती हैं।

  • न्यूनतम नुकसान: आमतौर पर 33% से अधिक नुकसान होने पर ही किसान सहायता के पात्र होते हैं।
  • सर्वेक्षण: नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित जिले के अधिकारी (राजस्व विभाग/कृषि विभाग) गिरदावरी या सर्वेक्षण करते हैं।

उपरोक्त दोनों ही स्थितियों में किसानों को फसल नुकसान होते ही इसकी जानकारी बीमा कंपनी और कृषि विभाग के माध्यम में जरूर दर्ज करानी चाहिए। साथ ही खराब फसलों की तस्वीरें व वीडियों और उस दिन मौसम में आए बदलाव की जानकारी भी रखनी चाहिए। 

हाल की बारिश और ओलावृष्टि के बाद विभिन्न राज्य सरकारों के कृषि विभागों ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर पहुंचकर फसल खराबे का निरीक्षण करें और प्रभावित किसानों को त्वरित राहत दिलाने में सहयोग करें। सरकार ने फसल बीमा कंपनियों को भी निर्देश दिया गया है कि प्राप्त सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करते हुए फील्ड सर्वे शुरू किया जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन कर शीघ्र बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।