लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन, राज्यवार कृषि रोडमैप बनाने पर फोकस
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया। केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि विकास का अगला दौर तभी सफल होगा जब वैज्ञानिक शोध खेत तक पहुंचेगा, योजनाएं छोटे किसान तक प्रभावी रूप से उतरेंगी और हर राज्य अपनी भौगोलिक व जलवायु परिस्थितियों के अनुसार स्पष्ट रोडमैप बनाएगा।
उत्तर भारत की खेती-किसानी को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को लखनऊ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) आयोजित किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सहित 6 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री शामिल हुए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि पहले खरीफ और रबी को लेकर पूरे देश की एक ही बैठक होती थी, लेकिन इतने बड़े देश में एक ही मंच पर सभी समस्याओं और संभावनाओं पर गहराई से चर्चा संभव नहीं थी। इसी कारण अब जोनल कॉन्फ्रेंस की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की माटी, जलवायु, फसल प्रणाली और चुनौतियों के अनुसार बेहतर रणनीति तय की जा सके।
उन्होंने कहा कि देश के सामने तीन बड़े लक्ष्य स्पष्ट हैं—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पोषणयुक्त आहार की उपलब्धता। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, किसानों को उनके श्रम का उचित मूल्य दिलाना, फसल नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि बढ़ती खपत वास्तविक आवश्यकता पर आधारित है या केवल परंपरागत आदत का परिणाम है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अपना कृषि रोडमैप तैयार करने की अपील करते हुए कहा कि जब तक राज्य अपनी परिस्थितियों के अनुसार दीर्घकालिक लक्ष्य तय नहीं करेंगे, तब तक खेती और किसानों का समग्र विकास संभव नहीं होगा।
उन्होंने किसान आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड पर भी जोर देते हुए कहा कि किसानों की पहचान, ऋण, योजनाओं और सेवाओं को सरल बनाने में ये दोनों महत्वपूर्ण साधन हैं। उनके अनुसार किसान आईडी बनने से कई प्रक्रियाएं आसान होंगी, जबकि वंचित किसानों तक किसान क्रेडिट कार्ड पहुंचाने से छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दर पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन हैं, इसलिए कृषि से जुड़ी चुनौतियां, संभावनाएं और प्राथमिकताएं भी अलग हैं। ऐसे में जोनवार चर्चा और योजना बनाना अधिक प्रभावी होगा। उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में “लैब टू लैंड” की अवधारणा जमीन पर उतर चुकी है, जिससे तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है। इस पहल के लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्रों को सक्रिय कर जवाबदेह बनाने और किसानों से उनका सीधा जुड़ाव बढ़ाने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कृषि विकास दर में वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस बदलाव के संकेत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अब अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और उनमें विश्वास बढ़ा है कि थोड़े प्रयास से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अब कई क्षेत्रों में किसान एक फसल के बजाय दो और तीन फसलों के मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि को फूड प्रोसेसिंग, मांग आधारित उत्पादन और वैल्यू एडिशन से जोड़ना होगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और वे कृषि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी भी उपस्थित रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, पंजाब के उद्यान मंत्री महेंद्र भगत, हिमाचल प्रदेश के उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी, जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्री जावेद अहमद डार, उत्तर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह तथा उत्तर प्रदेश के कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख भी सम्मेलन में शामिल हुए।

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