एक माह में चीनी कंपनियों के शेयरों में 45 फीसदी तक की तेजी, जानिए क्या है वजह

शुगर स्टॉक्स में हाल के दिनों में तेज उछाल देखा गया। एक महीने में कंपनियों के शेयर भाव 45% तक बढ़े हैं। इनमें ईआईडी पैरी इंडिया, बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज, श्री रेणुका शुगर्स और बजाज हिंदुस्तान शुगर जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। आखिर क्या है इस तेजी का कारण

एक माह में चीनी कंपनियों के शेयरों में 45 फीसदी तक की तेजी, जानिए क्या है वजह

चीनी उत्पादन करने वाली भारतीय कंपनियों के शेयरों में पिछले कुछ दिनों से तेजी का माहौल है। महीने भर में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स एनएसई 50 (NSE 50) करीब 4.3 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन चीनी कंपनियों के शेयरों में 45 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिला है। प्रमुख 20 कंपनियों के शेयरों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इनमें से 16 कंपनियों के शेयर भाव 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े हैं। यही नहीं, नौ कंपनियों के शेयरों में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 

हालांकि शुक्रवार का दिन कुछ अलग रहा। इस दिन सिंभावली शुगर्स और डॉलेक्स एग्रोटेक लि. को छोड़कर सभी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। बलरामपुर चीनी मिल्स, डालमिया भारत शुगर, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज, श्री रेणुका शुगर्स जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में ही ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

मार्केट कैप के लिहाज से पांच सबसे प्रमुख कंपनियों में ईआईडी पैरी इंडिया लि. के शेयर एक माह में 6.47 प्रतिशत, बलरामपुर चीनी मिल्स लि. के शेयर 8.19 प्रतिशत, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लि. के शेयर 12.48 प्रतिशत, श्री रेणुका शुगर्स लि. के शेयर 14.24 प्रतिशत और बजाज हिंदुस्तान शुगर लि. के शेयर 21.57 प्रतिशत चढ़े हैं। 

अन्य प्रमुख कंपनियों में सिंभावली शुगर्स लि. के शेयरों में 45.88 प्रतिशत, आंध्र शुगर्स में 34.80 प्रतिशत, मवाना शुगर्स में 29.98 प्रतिशत, शक्ति शुगर्स में 24 प्रतिशत और राणा शुगर्स के शेयरों में 25.14 प्रतिशत का उछाल बीते एक महीने में आया है। 

शुगर स्टॉक्स में इस तेजी के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। एक प्रमुख कारण चालू चीनी सीजन (2025-26) के अंत में चीनी के बकाया स्टॉक का नौ साल के निचले स्तर पर रहने का अनुमान है। चालू साल में चीनी उत्पादन करीब 280 लाख टन पर रहने की संभावना है। पिछले साल तक चीनी उद्योग देश में 285 से 290 लाख टन तक खपत का अनुमान बता रहा था। इस आधार पर चीनी उत्पादन (इथेनॉल के लिए डायवर्जन को छोड़कर) खपत से भी कम रहेगा। पिछले साल के बकाया 50 लाख टन चीनी स्टॉक और करीब 10 लाख टन चीनी निर्यात के आधार पर इस साल के अंत में चीनी का बकाया स्टॉक 40 लाख टन के आसपास रहेगा। यह 2016-17 के 39.4 लाख टन के स्टॉक के बाद सबसे कम होगा।

इन आंकड़ों को चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी का कारण माना जा रहा है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के बाद चीनी की कीमतों में तेजी का रुख आना लगभग तय है क्योंकि फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हर माह अधिक कोटा जारी कर रही है। लेकिन आने वाले महीनों में कोटा की मात्रा काम हो सकती है।

चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 15 अप्रैल तक देश की 539 चीनी मिलों में से 520 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी थी। केवल 19 चीनी मिलों में फिलहाल पेराई जारी थी। मध्य अप्रैल तक चीनी उत्पादन (इथेनॉल के अलावा) 274.80 लाख टन रहा है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ा सकती है। विधानसभा चुनावों के बाद इसके बारे में फैसला हो सकता है। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है।

एक और कारण इथेनॉल से संबंधित है। ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। इस समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक चल रहा है। तेल आयात बिल कम करने के लिए सरकार ईंधन में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इससे इसकी मांग आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने भी केंद्र सरकार से पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी (E30) करने की मांग की है। इस्मा के अनुसार देश में सालाना करीब 2,000 करोड़ लीटर से अधिक घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता है, जो 20 फीसदी मिश्रण के लिए आवश्यक 1,100 करोड़ लीटर से काफी ज्यादा है। यह भी माना जा रहा है कि इथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार इसके दाम भी बढ़ा सकती है। इसका सीधा फायदा चीनी मिलों को मिलेगा।

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