देश में 8 नए यूरिया संयंत्रों को मंजूरी मिलने की संभावना, 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश से बढ़ेगा यूरिया उत्पादन

घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार 14 प्रस्तावों में से आठ नए यूरिया संयंत्रों को मंजूरी दे सकती है। इन परियोजनाओं पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार जल्द ही आठ नए यूरिया उत्पादन संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी दे सकती है। इन संयंत्रों पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इसके लिए सरकार को मिले आवेदनों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, सहकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रस्ताव शामिल हैं।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा नई यूरिया निवेश नीति की घोषणा के बाद नए यूरिया संयंत्रों के प्रस्तावों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इन प्रस्तावों पर अक्तूबर में फैसला होने की संभावना है। नई नीति के जरिए सरकार गैस आधारित यूरिया संयंत्रों में नए निवेश को प्रोत्साहित करेगी, जिससे उर्वरकों की आपूर्ति घरेलू उत्पादन से सुनिश्चित की जा सके।

आठ संयंत्रों पर 80 हजार करोड़ का निवेश

इस साल जुलाई में राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 घोषित होने से पहले सरकार को नए यूरिया संयंत्रों के लिए सात आवेदन मिले थे। सूत्रों के मुताबिक, अब इनकी संख्या बढ़कर 14 हो गई है। सरकार इनमें से आठ संयंत्रों के आवेदनों को मंजूरी दे सकती है। एक यूरिया संयंत्र पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश होता है। ऐसे में आठ संयंत्रों की मंजूरी का अर्थ है कि उर्वरक क्षेत्र में करीब 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। 

उत्तर प्रदेश में दो संयंत्रों के प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश में दो संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव हैं। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि राज्य में उर्वरक संयंत्र स्थापित हों। उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में उर्वरक संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी मिलना राजनीतिक रूप से भी एक अहम कदम होगा। 

सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक कंपनी  हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) अपने गोरखपुर स्थित संयंत्र की दूसरी इकाई स्थापित करना चाहती है। इसका आवेदन भी सरकार के पास जल्द आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह एचयूआरएल के बोर्ड ने गोरखपुर स्थित यूरिया संयंत्र के विस्तार को मंजूरी दी है।

इसके अलावा, शाहजहांपुर स्थित सरकारी संस्था कृभको की सब्सिडियरी कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (केएफएल) की इकाई का विस्तार करने का प्रस्ताव है। केएफएल वहां नया यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव सरकार को दे चुकी है।

गेल समेत कई कंपनियों के आवेदन

यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा दो संयंत्रों के लिए दिए गए आवेदन भी शामिल हैं। इसके अलावा, चंबल फर्टिलाइजर्स और मैटिक्स फर्टिलाइजर्स के आवेदन भी शामिल हैं।

देश में सालाना 700 लाख टन से अधिक उर्वरकों की खपत होती है, जिसमें सबसे अधिक करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। इसमें करीब 100 लाख टन यूरिया की आपूर्ति आयात से होती है। फरवरी 2026 में शुरू हुए खाड़ी युद्ध के चलते यूरिया संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई थी और सरकार को 900 डॉलर प्रति टन से अधिक की कीमत पर यूरिया का आयात करना पड़ा था। हालांकि, बाद में कीमतें घटकर 400 डॉलर प्रति टन तक आ गई थीं।

लेकिन इस तरह की अनिश्चितता भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े यूरिया आयातक और उपभोक्ता देशों में शामिल देश के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है। इसलिए सरकार चाहती है कि देश में ही यूरिया उत्पादन की क्षमता बढ़ाई जाए। हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर गैस का आयात करना पड़ता है और इस समय गैस की कीमतें 22 डॉलर से अधिक चल रही हैं।

यूरिया की खपत बढ़ने का अनुमान

देश में यूरिया की खपत सालाना तीन से चार फीसदी की दर से बढ़ रही है। चालू खरीफ सीजन इसका अपवाद हो सकता है, क्योंकि इस साल देश के बड़े हिस्से में कमजोर मानसून के चलते कम बारिश हुई है। हालांकि, यह स्थिति करीब एक दशक में पहली बार पैदा हुई है। इसलिए यूरिया की खपत में बढ़ोतरी जारी रहने की ही संभावना है।

इसीलिए सरकार नई यूरिया निवेश नीति लेकर आई है। हालांकि, उर्वरक उद्योग के कई पदाधिकारियों ने रूरल वॉयस को बताया कि नई नीति बहुत अधिक आकर्षक नहीं है और पुरानी नीति के मुकाबले इसमें थोड़ा ही सुधार हुआ है। लेकिन कई कंपनियां पहले से ही उर्वरक क्षेत्र में कारोबार कर रही हैं। ऐसे में वे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नया निवेश करना चाहती हैं।