किसान सभा ने ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और ITPGRFA प्रस्ताव को किया खारिज, 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध की घोषणा की है। संगठन ने किसानों से ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और ITPGRFA समझौता प्रस्ताव की प्रतियां जलाने को कहा गया है। संगठन ने केंद्र पर आरोप लगाया कि यह ड्राफ्ट बिल भारत की बीज संप्रभुता पर हमला है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाला है।

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने 10 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए केंद्र सरकार पर भारत की बीज संप्रभुता और किसान अधिकारों पर “त्रिस्तरीय हमला” करने का आरोप लगाया है। संगठन ने देशभर के जिलों, प्रखंडों और गांवों में किसानों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं कृषि पादप आनुवंशिक संसाधन संधि (ITPGRFA) के GB11 बैठक में तैयार समझौता प्रस्ताव की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज करें।

एआईकेएस ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ऐसी नीतियां आगे बढ़ा रही है जो किसानों की आजीविका को खतरे में डालती हैं और भारत के बीज क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों के नियंत्रण में सौंपने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। संगठन का कहना है कि सीड बिल 2025, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और लीमा में हुई GB11 बैठक - ये तीनों मिलकर राष्ट्रीय हित के विरुद्ध एक समन्वित नीतिगत बदलाव दर्शाते हैं।

एआईकेएस ने आरोप लगाया कि GB11 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने “किसानों के साथ विश्वासघात” किया है, क्योंकि उसने ऐसे प्रस्ताव का विरोध नहीं किया जो बिना उचित लाभ-साझेदारी के भारत की जैव-संपदा पर कॉर्पोरेट की पहुंच बढ़ाता है। संगठन का कहना है कि भारत की यह चुप्पी वैश्विक बीज निगमों के हितों को बढ़ावा देने की मंशा दिखाती है, जबकि भारतीय किसान पीढ़ियों से जैव विविधता की रक्षा करते आए हैं।

एआईकेएस ने GB11 के घटनाक्रम को भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं से भी जोड़ा। इसका कहना है कि ये वार्ताएं भारत के पेटेंट कानूनों को कमजोर कर सकती हैं, विदेशी बीज एकाधिकारों का रास्ता खोल सकती हैं और आनुवंशिक रूप से परिवर्तित तथा सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादन को निर्बाध प्रवेश दे सकती हैं। संगठन के अनुसार, ऐसे समझौते किसानों की आय को नुकसान पहुंचाएंगे और भारत की खाद्य संप्रभुता को कमजोर करेंगे।

हाल ही केंद्र द्वारा जारी ड्राफ्ट सीड बिल 2025 पर एआईकेएस का कहना है कि यह विधेयक किसानों के बीज बचाने, आपस में बांटने और बेचने के पारंपरिक अधिकार को सीमित करता है। पंजीकृत और कॉर्पोरेट-स्वामित्व वाले बीजों पर जोर देने से पारंपरिक प्रथाओं को अपराध माना जाने लगेगा जिससे कृषि पर कॉर्पोरेट नियंत्रण और गहरा होगा।

एआईकेएस ने इस “समन्वित आत्मसमर्पण” वाली नीतिगत दिशा को तुरंत बदलने की मांग करते हुए सीड बिल 2025 की वापसी, ITPGRFA समझौता प्रस्ताव को अस्वीकार करने तथा किसान हितों को कमजोर करने वाली व्यापार वार्ताओं को रोकने की मांग की।

एआईकेएस ने 10 दिसंबर को, जो स्वतंत्रता सेनानी बाबू गनु की स्मृति में मनाया जाता है, राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के रूप में चुना है। संगठन ने कहा कि किसान “सरकार को देश की संप्रभुता और अन्न उत्पादकों के अधिकारों को गिरवी नहीं रखने देंगे।”