कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित हो बजट 2026, उद्योग जगत ने दिए सुझाव

केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले एग्रीबिजनेस जगत के अग्रणी, एग्री-टेक उद्यमी और खाद्य उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर, पोषण-केंद्रित खेती, जैव ईंधन और मूल्यवर्धित डेयरी में लक्षित निवेश का सुझाव दिया है।

जैसे-जैसे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट की तैयारी जोर पकड़ रही है, यह अपेक्षा बढ़ती जा रही है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में मामूली कदमों से आगे बढ़ते हुए बड़े संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया जाएगा। एग्रीटेक, जैवईंधन, पोषण और डेयरी क्षेत्रों के उद्योग विशेषज्ञों का सुझाव है कि हालिया उपलब्धियों को आधार बनाते हुए केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर मूल्य सृजन, रेजिलिएंस और समावेशी विकास पर ध्यान दिया जाए।

आर्या.एजी (Arya.ag) के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक आनंद चंद्रा के अनुसार, प्राथमिकता सीधे खेत के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने माइक्रो-वेयरहाउसिंग और वैज्ञानिक भंडारण जैसी विकेंद्रीकृत अवसंरचना के बढ़ते प्रभाव की जरूरत बताई जो किसानों को मजबूरी में फसल बेचने से बचाने और बाजार का सही समय चुनने में मदद करती है। वे कहते हैं, “खेत स्तर पर समय पर और आसान ऋण उपलब्ध होने से अधिक किसान, विशेषकर महिलाएं और युवा, अपनी उपज को रोककर बेहतर बाजारों तक पहुंच बना पा रहे हैं।”

चंद्रा को उम्मीद है कि बजट में इन कारगर उपायों को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा। उनके अनुसार, विकेंद्रीकृत बुनियादी ढांचा, समावेशी वित्त और मजबूत किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है वहां जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी हैं। वह ड्रोन, एआई आधारित गुणवत्ता ग्रेडिंग और जलवायु परामर्श जैसी तकनीक को अपनाने वाले एग्रीटेक स्टार्टअप्स की भूमिका को भी रेखांकित करते हैं। उन्होंने कहा, “ये उपकरण छोटे किसानों के लिए उपयोगी होने चाहिए। ये सरल, किफायती और सीमित संसाधनों वाले परिवेश में प्रभावी हों। सही समर्थन मिलने पर ऐसे नवाचार उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, नुकसान घटा सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।”

एथेनॉल की अतिरिक्त क्षमता से निपटने की जरूरत
खाद्यान्न उत्पादन से आगे बढ़ते हुए नीति-निर्माताओं से ऊर्जा और औद्योगिक परिवर्तन में कृषि की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान देने का आग्रह किया गया है। गोदावरी बायोरिफाइनरीज लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक डॉ. संगीता श्रीवास्तव के अनुसार, भारत का तय समय से पहले ई-20 एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य हासिल कर लेना अब एक नई चुनौती - अतिरिक्त उत्पादन क्षमता - को जन्म दे रहा है। उनका मानना है कि बजट 2026 में मांग बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया जाना चाहिए। जैसे ई-100 के लिए तैयार बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन देना और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के अनिवार्य उपयोग को बढ़ाना।

श्रीवास्तव के अनुसार, इससे अतिरिक्त एथेनॉल की खपत में मदद मिलेगी। उनका कहना है, “इस बजट को ईंधन में मिश्रण से आगे बढ़कर सस्टेनेबल रासायनिक अर्थव्यवस्था में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में जाने के लिए आवश्यक ढांचा प्रदान करना चाहिए।” इस दृष्टि से बायोफ्यूल्स को औद्योगिक विकास के एक प्रमुख साधन के रूप में देखा जा रहा है।

पोषण-केंद्रित कृषि बढ़ाने की मांग
पोषण एक और ऐसा क्षेत्र है जहां विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब केवल उत्पादन (यील्ड) से आगे बढ़ना होगा। बेटर न्यूट्रिशन (Better Nutrition) के सह-संस्थापक और सीईओ प्रतीक रस्तोगी का कहना है कि पिछले वर्ष के बजट में कृषि को सही मायनों में भारत के पहले विकास इंजन के रूप में स्थापित किया गया था, लेकिन अगला कदम नतीजों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम भोजन की कमी से नहीं जूझ रहे हैं, बल्कि हमारे भोजन में पोषक तत्वों की कमी है।”

रस्तोगी ने राष्ट्रीय नीति के तहत बायोफोर्टिफाइड (पोषक तत्वों से समृद्ध) बीजों और पोषण-केंद्रित कृषि को मुख्यधारा में लाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका तर्क है कि बीज और फसल स्तर पर आयरन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर कर भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, साथ ही किसानों के लिए उच्च मूल्य वाले बाजार भी तैयार कर सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की खेती और प्रसंस्करण करने वाले स्टार्टअप्स तथा किसान नेटवर्क को समर्थन देने से बेहतर मूल्य मिलेगा और सुनिश्चित मांग बनेगी, जिससे कृषि आय सीधे बेहतर पोषण से जुड़ सकेगी।

बजट में सिंचाई, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे और ग्रामीण लॉजिस्टिक्स के लिए पूंजीगत आवंटन बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, दक्षता और मूल्य निर्धारण में सुधार के लिए ई-नाम (eNAM), डेटा-आधारित परामर्श सेवाओं और रिमोट सेंसिंग के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के नीति के केंद्र में बने रहने की उम्मीद है।

डेयरी में मात्रा नहीं, मूल्य पर जोर देने की जरूरत
ग्रामीण आजीविका की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। भारत में दूध उत्पादन पिछले एक दशक में लगभग 14.6 करोड़ टन से बढ़कर 2023-24 में 23.9 करोड़ टन से अधिक हो गया। प्रति व्यक्ति उपलब्धता वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है। हालांकि, अब नीति-निर्माताओं से मात्रा के बजाय मूल्य सृजन को प्राथमिकता देने की उम्मीद की जा रही है।

हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्राह्मणी नारा का कहना है कि हालिया जीएसटी संशोधन से संगठित डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा मिला है और उपभोक्ता मांग अधिक प्रोटीन व स्वास्थ्य केंद्रित उत्पादों की ओर शिफ्ट हुई है। बजट 2026 के लिए उन्होंने तीन प्राथमिकताएं गिनाईं - गुणवत्तापूर्ण पशु आहार और क्रोमोसोम-सॉर्टेड सीमेन तक पहुंच, पशु चिकित्सा शिक्षा क्षमता का विस्तार, और विशेषकर महिला उद्यमियों के लिए मिनी-डेयरी इकाइयों पर अधिक पूंजी सब्सिडी।