हर एफटीए और समझौता राष्ट्रहित में, किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित: शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो लोग किसानों के नाम पर भय और अफवाह का कारोबार चला रहे हैं, उनकी सारी कथित राजनीति झूठ के सहारे खड़ी है, जबकि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के किसानों के हित “पूरी तरह सुरक्षित” हैं और रहेंगे।

हर एफटीए और समझौता राष्ट्रहित में, किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत द्वारा किए गए सभी मुक्त व्यापार समझौते और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील पूरी तरह राष्ट्रहित में हैं और इनमें किसानों के हितों की सर्वोच्च रक्षा की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में खेत या किसान के हितों से समझौता नहीं किया गया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 64वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चाहे समझौते यूरोपियन यूनियन के साथ हों, अमेरिका के साथ हों या अन्य देशों के साथ, सभी निर्णय व्यापक आकलन के बाद लिए गए हैं और किसानों की सुरक्षा सर्वोपरि रही है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में भी भारत के राष्ट्रीय हित और कृषि क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग किसानों के नाम पर भय और अफवाह फैलाकर राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोग “देश बिक गया” जैसे नारों के जरिए झूठ का वातावरण बनाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।

प्रमुख फसलें और डेयरी पूरी तरह संरक्षित

मंत्री ने स्पष्ट किया कि गेहूं, मक्का, चावल, सोया और मोटे अनाज जैसी प्रमुख फसलों के लिए किसी भी प्रकार से आयात के द्वार नहीं खोले गए हैं। डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि जिन वस्तुओं का आयात किया गया है, वे देश की आवश्यकता के अनुरूप हैं और किसानों के हितों पर कोई आंच नहीं आने दी गई है।

आईएआरआई को बताया कृषि प्रगति का प्राण केंद्र

शिवराज सिंह चौहान ने आईएआरआई को देश की कृषि प्रगति का केंद्र बताते हुए कहा कि हरित क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत यहीं से हुई थी। उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित कृषि और समृद्ध किसान इस संकल्प की आधारशिला हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं। कृषि में 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने, विज्ञान आधारित और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने तथा जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘Lab to Land’ और स्टार्टअप पर जोर

मंत्री ने कहा कि “लैब टू लैंड” केवल नारा नहीं, बल्कि हर वैज्ञानिक की जिम्मेदारी है कि शोध प्रयोगशालाओं की तकनीक खेत तक पहुंचे। उन्होंने प्राकृतिक खेती, माइक्रो-इरिगेशन, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।

युवाओं को “Job Seeker” के बजाय “Job Creator” बनने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने का आह्वान किया।

समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट तथा आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 290 एमएससी और एमटेक तथा 180 पीएचडी छात्र शामिल हैं।

 

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