भारत सरकार ने खोला गेहूं निर्यात, गेहूं उत्पादों और चीनी के अतिरिक्त निर्यात को मंजूरी

केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं, 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात को मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला घरेलू कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने में सहायक होगा।

भारत सरकार ने खोला गेहूं निर्यात, गेहूं उत्पादों और चीनी के अतिरिक्त निर्यात को मंजूरी

केंद्र सरकार ने करीब चार साल बाद गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध समाप्त कर दिया है। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं के निर्यात अनुमति दी है। इसके साथ ही कुछ दिन पहले गेहूं उत्पादों के लिए दी गई पांच लाख टन के निर्यात की अनुमति के अलावा पांच लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी गई है। पांच लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात को भी मंजूरी दी गई है। शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय द्वारा इन फैसलों की जानकारी दी गई।

मई 2022 में, केंद्र सरकार ने गेहूं उत्पादन में गिरावट के कारण बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही गेहूं भंडारण पर भी समय-समय पर स्टॉक लिमिट लागू की गई। हाल ही में गेहूं पर स्टॉक लिमिट को समाप्त किया गया था।

अब देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार, बंपर उत्पादन और घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को देखते हुए सरकार ने निर्यात खोलने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता और बेहतर उत्पादन की संभावना के कारण घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें गिरने लगी हैं।  निर्यात का रास्ता खुलने से उम्मीद है कि गेहूं गिरती कीमतों को सहारा मिलेगा।    

खाद्य मंत्रालय के अनुसार, अधिक स्टॉक की उपलब्धता, कीमतों में नरमी और अधिक उत्पादन के अनुमान को देखते हुए, 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन अतिरिक्त गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। सरकार के इस फैसले से घरेलू कीमतों को संभालने और बाजार में स्थायित्व लाने में मदद मिलेगी।

पर्याप्त गेहूं भंडार 

मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025–26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 32 लाख टन अधिक है। यह वृद्धि देश में पर्याप्त आपूर्ति का संकेत देती है।

इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि निर्यात की यह अनुमति घरेलू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रभावित नहीं करेगी। 

रबी 2026 में बढ़ा गेहूं रकबा

रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और इस वर्ष भी बेहतर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है। आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विटंल तय किया गया है।

सरकार का मानना है कि अधिक भंडार, नरम पड़ती कीमतों और संभावित अधिक उत्पादन को देखते हुए 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। इससे घरेलू कीमतों को स्थिर रखने, भंडार प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय को मजबूती देने में मदद मिलेगी।

5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की मंजूरी

सरकार ने चालू चीनी सत्र 2025–26 के लिए इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति भी दी है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 के आदेश के तहत 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।

चीनी मिलों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक लगभग 1.97 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा चुका है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किए गए हैं।

अतिरिक्त 5 लाख टन का निर्यात कोटा इच्छुक मिलों को इस शर्त पर आवंटित किया जाएगा कि वे 30 जून 2026 तक आवंटित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत निर्यात करें। मिलों को आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी और आवंटित कोटा किसी अन्य मिल को स्थानांतरित या अदला-बदली नहीं किया जा सकेगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से देश में चीनी की अधिशेष उपलब्धता के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

 

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