बासमती की किस्में डेवलप करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह को पद्मश्री सम्मान

जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। डॉ. सिंह प्लांट जेनेटिक्स, खास तौर पर बासमती चावल की ब्रीडिंग के लिए मशहूर हैं।

बासमती की किस्में डेवलप करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह को पद्मश्री सम्मान

जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। डॉ. सिंह प्लांट जेनेटिक्स, खास तौर पर बासमती चावल की ब्रीडिंग के लिए मशहूर हैं। डॉ. सिंह पिछले 30 सालों से IARI में बासमती चावल की 25 किस्मों के डेवलपमेंट से जुड़े रहे हैं। ये किस्में अभी 20 लाख हेक्टेयर इलाके में उगाई जाती हैं। ये किस्में लाखों बासमती किसानों के लिए खुशहाली लेकर आई हैं और इनसे देश को हर साल 50,000/- करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की आय होती है।

नई दिल्ली स्थित आईसीएआर - इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. सिंह को रूरल वॉयस ने पिछले वर्ष दिसंबर में प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया था। वे और भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुके हैं। कुछ प्रमुख अवॉर्ड हैं- रफी अहमद किदवई अवॉर्ड, भारत रत्न डॉ. सी. सुब्रमण्यम और नाना जी देशमुख इंटरडिसिप्लिनरी टीम अवॉर्ड, बोरलॉग अवॉर्ड, IARI का बेस्ट टीचर अवॉर्ड, IARI का डॉ. बी.पी. पाल अवॉर्ड, वासविक अवॉर्ड, ओमप्रकाश भसीन अवॉर्ड और डी.एस. बराड़ अवॉर्ड।

डॉ. ए.के. सिंह को दिसंबर 2025 में रूरल वॉयस ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया था।

डॉ. सिंह ने दो किताबें भी लिखी हैं। वे INSA, NASI और NAAS के फेलो हैं। दुनिया की जानी-मानी पत्र-पत्रिकाओं में उनके 250 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं। 

डॉ. सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व छात्र हैं, जहां से उन्होंने कृषि में ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट की पढ़ाई प्लांट जेनेटिक्स और ब्रीडिंग में विशेषज्ञता के साथ पूरी की। इसके बाद धान प्रजनन पर किए गए शोध के लिए नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई।

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