गेहूं पर किसानों को राजस्थान में 150 और मध्य प्रदेश में 40 रुपये बोनस मिलेगा, खरीद की तैयारियां शुरू
रबी सीजन 2026-27 में गेहूं पर राजस्थान सरकार 150 रुपये और मध्य प्रदेश सरकार 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी, जो केंद्र के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये से अतिरिक्त होगा। वहीं उत्तर प्रदेश ने कोई बोनस घोषित नहीं किया है।
रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की खरीद के लिए राज्य सरकारों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राजस्थान सरकार ने 10 मार्च से शुरू होने जा रही गेहूं खरीद पर 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार गेहूं की खरीद पर किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी। यह बोनस केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल के अतिरिक्त दिया जाएगा।
इस प्रकार राजस्थान में किसानों को गेहूं का भाव 2735 रुपये और मध्य प्रदेश में 2625 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश ने गेहूं खरीद पर कोई बोनस घोषित नहीं किया है। यूपी के किसानों को सरकारी खरीद में गेहूं 2585 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर ही बेचना होगा और यहां सरकारी खरीद भी अन्य राज्यों की तुलना में कम रहने की संभावना है।
मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले साल गेहूं खरीद पर 175 रुपये का बोनस देते हुए 2600 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर गेहूं की खरीद की थी। लेकिन इस बार एमपी सरकार ने गेहूं पर केवल 40 रुपये का बोनस घोषित किया है, जिसे विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने नाकाफी बताते हुए इसकी आलोचना की है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के कार्यकारी अध्यक्ष केदार सिरोही का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले किसानों को एक चौथाई बोनस भी नहीं मिला है, जबकि भाजपा ने 2023 के चुनाव में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपये देने का वादा किया था। उनका कहना है कि आज तीन साल बाद भी किसानों को यह भाव नहीं मिला है।
उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में कहा कि सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी वर्षों में इस लक्ष्य को पूरा करेगी और उससे भी आगे बढ़ेगी। इस दौरान कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई आने की बात सामने आई, जिस पर मुख्यमंत्री ने अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च करने का ऐलान किया।

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