भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों का कड़ा विरोध, आंदोलन की चेतावनी

भारत–अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों का विरोध तेज हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार पर कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों से समझौते का आरोप लगाया है।

भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर किसान संगठनों का कड़ा विरोध, आंदोलन की चेतावनी

भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि “कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है।” एसकेएम ने चेतावनी दी है कि यदि इस समझौते में किसी भी कृषि या डेयरी उत्पाद को शामिल किया गया, तो एक बार फिर 2020–21 जैसा किसान आंदोलन होगा। 

एसकेएम 4 से 11 फरवरी तक व्यापार समझते के खिलाफ अभियान चलाने, नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के पुतले जलाने तथा 12 फरवरी को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। मोर्चा ने अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय किसानों को तबाह कर देगा।

एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री के बयान को अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिन्स के दावे से पूरी तरह विरोधाभासी बताया। रोलिन्स के अनुसार, इस समझौते के तहत अमेरिका “भारत के विशाल बाजार में अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात करेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी का प्रवाह होगा।" एसकेएम का आरोप है कि इन दावों पर भारत सरकार की ओर से न तो खंडन किया गया और न ही कोई आपत्ति जताई गई, जिससे किसानों को गुमराह किया जा रहा है।

मोर्चा ने कपास का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से किसानों के हितों की रक्षा की बात कही थे, लेकिन मात्र तीन दिन बाद ही कपास पर लगने वाले 11% आयात शुल्क को हटाने की अनुमति दे दी। एसकेएम के अनुसार, आयात बढ़ने से घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ा और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दामों पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा।

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को “राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा” बताते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिकी दबाव में किया जा रहा आत्मसमर्पण है। संगठन का आरोप है कि शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने से भारतीय बाजार अमेरिकी वस्तुओं से पट जाएगा, जिससे कृषि, उद्योग और रोजगार पर विनाशकारी असर पड़ेगा।

AIKS की मांग है कि केंद्र सरकार भारत–अमेरिका व्यापार समझौते, भारत–यूके FTA तथा भारत–यूरोपीय संघ FTA का पूरा पाठ संसद के समक्ष रखे और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा सुनिश्चित करे। इस सरकार द्वारा किए गए सभी मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और जन-विरोधी मुक्त व्यापार समझौतों तथा व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए। 

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