कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख बजट घोषणाएं: जानिए बजट में किसानों को क्या मिला
केंद्रीय बजट 2026–27 में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी कुछ घोषणाएं की गई हैं। लेकिन कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए किसी स्पष्ट और व्यापक रोडमैप की कमी भी बजट में साफ दिख रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026–27 पेश करते हुए “सबका साथ, सबका विकास” के तहत किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने को सरकार के कर्तव्यों में शुमार किया। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार के बजट में कृषि और किसानों को अपेक्षाकृत कम महत्व दिया गया है।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में उच्च मूल्य वाली फसलों, मत्स्य पालन एवं पशुपालन, AI तथा सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं जरूर की हैं, लेकिन कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए कोई व्यापक रणनीति या स्पष्ट रोडमैप बजट में नजर नहीं आता।
पशुपालन में उद्यमिता पर जोर
पशुपालन क्षेत्र किसानों की आय में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान करता है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना शुरू की जाएगी। इससे देश में 20 हजार से अधिक वेटनरी प्रोफेशनल्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पैरा-वेट कॉलेज, अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित करने के लिए ऋण आधारित पूंजी सब्सिडी दी जाएगी। भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पशुधन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन, डेयरी और पोल्ट्री आधारित उद्यमों तथा मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार किया जाएगा। पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
मत्स्य पालन को महत्व
मत्स्य पालन के लिए बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा की गई है। तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को स्टार्टअप, महिला समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) के माध्यम से बाजार से जोड़ा जाएगा।
भारतीय जहाजों द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्र में पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई इन मछलियों को निर्यात माना जाएगा, जिससे भारतीय मछुआरों को नए अवसर मिलेंगे।
उच्च मूल्य कृषि उपजों पर जोर
कृषि उत्पादन में विविधता लाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र में अगर (Agar) वृक्षों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और पाइन नट को भी बढ़ावा मिलेगा।
नारियल संवर्धन योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत पुराने और कम उत्पादक पेड़ों को नई उच्च उत्पादक किस्मों से बदला जाएगा। इससे लगभग लगभग एक करोड़ किसानों को लाभ पहुंचेगा।
काजू और कोको के लिए अलग कार्यक्रम लाया जाएगा ताकि भारत इनके उत्पादन में आत्मनिर्भर बने और 2030 तक भारतीय काजू और कोको को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सके।
चंदन के प्लांटेशन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर भारतीय चंदन के गौरव को फिर से स्थापित करने काम करेगी।
अखरोट, बादाम और चिलगोजा के पुराने, कम उत्पादक बागानों के जीर्णोद्धार तथा सघन खेती के विस्तार के लिए एक समर्पित कार्यक्रम चलाया जाएगा।
कृषि में AI: भारत-विस्तार
बजट में एक अहम डिजिटल पहल भारत-विस्तार (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) की घोषणा की गई है। यह एक बहुभाषी एआई टूल होगा, जो एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि पैकेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली से जोड़ेगा।
भारत-विस्तार के जरिए किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार कृषि सलाह मिलेगी। इससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण महिला उद्यमों के लिए SHE-मार्ट
लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) मार्ट शुरू करने की घोषणा की है। ये सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट होंगे, जो ग्रामीण महिलाओं को उद्यम की मालिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाएंगे।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल
खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को सशक्त बनाने के लिए बजट में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे वैश्विक बाजार से जुड़ाव और ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) योजना और ग्रामीण युवाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
सहकारी क्षेत्र
बजट में सहकारी क्षेत्र के लिए कर कटौती प्रोत्साहन का दायरा बढ़ाया गया है। अब पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों को भी कटौती का लाभ मिलेगा, बशर्ते यह आपूर्ति सरकारी संगठन या फेडरल कोऑपरेटिव को की जाए।
नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय (Inter-Cooperative Society Dividend Income) को भी कटौती के रूप में मान्य किया जाएगा, बशर्ते इसे आगे सदस्यों में वितरित किया जाए।
किसी अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी महासंघ (National Cooperative Federation) को 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्षों के लिए कर छूट दी जाएगी। यह छूट केवल सदस्य सहकारी समितियों को आगे वितरित किए गए लाभांश पर ही मान्य होगी।

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