अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, भारतीय किसानों के हितों पर हमला बताया
अमेरिका–भारत ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि इस समझौते में भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की गई है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव में आकर आत्मसमर्पण किया है। कांग्रेस ने व्यापार समझौते की पूरी जानकारी संसद में रखने की मांग की है, ताकि किसानों और उद्योगों पर पड़ने वाले असर को देश के सामने स्पष्ट किया जा सके।
भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश और किसानों के हितों पर हमला करार दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए “पूरी तरह सरेंडर” कर दिया है। कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में हंगामा किया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस व्यापार समझौते में भारत के किसानों की मेहनत, खून-पसीने और देश के हितों को प्रधानमंत्री ने बेच दिया है। इसलिए उन्हें संसद में बोलने से रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी पर भयंकर दबाव है।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि प्रधानमंत्री पर किस तरह का दबाव है, तो उन्होंने कहा कि अडानी केस और एपस्टीन फाइल्स के संभावित खुलासों के दबाव में आकर प्रधानमंत्री ने यह ट्रेड डील की है। एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी कई बातें अभी सामने आनी बाकी हैं, जिन्हें अमेरिका ने अब तक जारी नहीं किया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सीजफायर की तरह ट्रेड डील की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई। अब भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी राष्ट्रपति ट्रंप या उनके नियुक्त प्रतिनिधियों से मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दी गई जानकारी से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे भारत की स्थिति कमजोर हुई है।
कांग्रेस ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों की पूरी जानकारी संसद के दोनों सदनों में रखने और इस पर चर्चा कराने की मांग की है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि ट्रेड डील में किन बिंदुओं पर बातचीत हुई और क्या तय हुआ, यह देश को जानने का अधिकार है। यदि कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोला जा रहा है तो आखिर सौदा क्या हुआ है? हमारे किसानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
दो फरवरी को जारी बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत अमेरिका पर लगाए गए टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को शून्य प्रतिशत तक घटाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका तथा वेनेजुएला से तेल की खरीद बढ़ाएगा।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका के लिए पूरा बाजार खोल दिया गया तो भारतीय उद्योग और ‘मेक इन इंडिया’ का क्या होगा? क्या मोदी सरकार रूस का साथ छोड़ने पर सहमत हो गई है?
अमेरिका की कृषि मंत्री ब्रुक रोलिन्स ने बयान जारी कर कहा है कि अब अमेरिका के किसानों के उत्पाद भारत के बाजार में बिकेंगे, जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में धन आएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसानों के लिए भारत का बाजार बेहद महत्वपूर्ण है और इस डील से ट्रंप ने अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाया है। अमेरिकी कृषि मंत्री के इस बयान के बाद व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
कृषि और डेयरी हितों की होगी रक्षा: पीयूष गोयल
वहीं इस मुद्दे पर एक प्रेस कांफ्रेंस में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष इस डील के माध्यम से भारत को मिलने वाले आर्थिक मौकों के रास्ते में बाधक बनना चाहता है। संसद में विपक्ष के व्यवहार की उन्होंने आलोचना की। इसके साथ ही दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी सेक्टर का ध्यान रखा है। इस समझौते में भी इनके हितों की रक्षा की जाएगी। हालांकि समझौते के तमाम फायदे गिनाने के बावजूद उन्होंने इस ट्रेड डील के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की।
समझौते के ब्यौरे का इंतजार
भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। समझौते का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि, तथ्य यह है कि इस समझौते से पहले ही अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
चालू वर्ष में जनवरी से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका से भारत का कृषि आयात 34.1 प्रतिशत बढ़कर 2.85 अरब डॉलर पहुंच गया। जबकि इसी अवधि में भारत से अमेरिका को होने वाला कृषि निर्यात मात्र 5.1 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर रहा। वर्ष 2024 में अमेरिका से पिस्ता और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट का 1.1 अरब डॉलर का आयात हुआ था, जो इस वर्ष 34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जनवरी से नवंबर के बीच 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
किसानों के हितों को लेकर चिंता
भारतीय किसानों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की आशंका के चलते सरकार इन उत्पादों के सस्ते आयात की अनुमति देने से बचती रही है। इसी कारण समझौते में देरी हुई। लेकिन 2 फरवरी को जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका समझौते की घोषणा की, उसके तुरंत बाद अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की बड़ी सौगात बताया और उनका धन्यवाद किया। इससे यह संकेत मिलता है कि इस समझौते में कृषि उत्पादों के आयात को सुगम बनाया गया है।
इधर, सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया है।फिर भी यह समझौता देश के किसानों और नीतिगत मामलों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए अब तक एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि सरकार ने इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

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